मज़दूर विरोधी नीतियो के ख़िलाफ़ समझौताविहीन संघर्ष बढ़ाना होगा

मोदी सरकार की मज़दूर-मेहनतकश विरोधी नीतियों के खिलाफ मज़दूर कन्वेंशन में कई प्रस्ताव पारित, 8 जनवरी 2020 के देशव्यापी हड़ताल को समर्थन

भुवनेश्वर (उड़ीसा), 1 दिसंबर। मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) का कन्वेंशन भुवनेश्वर में उस वक्त संपन्न हुआ जब मोदी सरकार लंबे संघर्षों से हासिल मज़दूरों के श्रम कानूनी अधिकार को छीन कर मजदूरों को बंधुआ बनाने, रेलवे सहित सरकारी-सार्वजनिक उद्योगों को देशी-विदेशी पूँजीपतियों को सौंपने, ले-ऑफ, छँटनी, बंदी का जोर बढ़ाने के साथ समाज में बंटवारे की राजनीति ख़तरनाक मुक़ाम पर है। कन्वेंशन में मासा द्वारा इन नीतियों की मुखालफत के साथ 9 प्रस्ताव पारित किए गए।

मासा का यह कन्वेंशन उस उड़ीसा राज्य में हुआ जहाँ कालाहांडी की भुखमरी है और जो देश का सबसे कम न्यूनतम मज़दूरी वाला राज्य है। खनिज व प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर इस राज्य में मज़दूरों की बदहाली के बीच पास्को, कलिंग नगर और नियमगिरि जैसे मज़दूरों-किसानों के शानदार लंबे संघर्ष आगे बढ़ते रहें है।

मासा के विभिन्न घटक संगठनों और मौजूद ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि यह एक खतरनाक दौर है, जब एक तरफ तमाम विरोधों को धता बताते हुए संसद में न केवल वेतन संहिता विधेयक को पारित कर दिए हैं, बल्कि उसकी नियमावली भी जारी कर दी गई है। जिसमें 9 घंटे से 16 घंटे तक काम कराने की खुली छूट मालिकों को मिल गई। मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों को चार संहिताओं में बदलने के इस क्रम में औद्योगिक सुरक्षा बिल संसद के पटल पर रख दिया है और औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक को भी लोकसभा में प्रस्तुत करके मजदूर वर्ग पर एक और बड़ा हमला बोल दिया है।

वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक स्थाई नौकरी की पूरी अवधारणा को बदलकर ठेका आधारित फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट और फोकट के मज़दूर नीम ट्रेनी लाने के साथ ही ट्रेड यूनियन बनाने और उसके संघर्ष के रास्तों में बड़ा अवरोध खड़ा करने का सामान जुटा लिया है।

वक्ताओं ने कहा कि रेलवे, बीएसएनल, भारत पेट्रोलियम सहित तमाम सार्वजनिक व सरकारी उद्योगों को अम्बानियों-अदानिओं के हाथों बेचने, सरकारी नौकरियों में उम्र के आधार पर छँटनी करने आदि की गति को तेज कर दिया है। दूसरी ओर समाज में बंटवारे की कुत्सित नीति को भी गति देते हुए कश्मीर की जनता के जनतांत्रिक अधिकारों को छीनने और कश्मीर के टुकड़े करने, देशभर में एनआरसी के माध्यम से नागरिक अधिकारों पर हमले करने, नागरिक संहिता के बहाने नागरिकों की अस्मिता पर चोट पहुंचाने जैसे खतरनाक एजेंडों को भी लागू कर रही है। इसी के साथ मज़दूर आंदोलन पर दमन तेज किया है।

वक्ताओं ने कहा कि मज़दूर विरोधी नीतियों के खिलाफ, समाज में बँटवारे की राजनीति के खिलाफ, मज़दूर मेहनतकश पर बढ़ते दमन के खिलाफ, बँटवारे की नीति के खिलाफ मासा देशव्यापी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए देश के संघर्षशील मज़दूर यूनियनों-संगठनों को एकजुट करने और जमीनी स्तर पर संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए लगातार सक्रियता बढ़ा रही है।

कन्वेंशन के अंत में 9 प्रस्ताव पारित किए गए जिसमें प्रस्तावित औद्योगिक संबंध संहिता, पारित वेतन संहिता विधेयक सहित 44 श्रम कानूनों को 4 संहिताओं में बांधकर मज़दूर अधिकारों पर हमले की मुखालफत किया गया है।

छँटनी, ले-ऑफ, बंदी व निजिकरण आदि के नाम पर मज़दूरों पर बढ़ते हमलों पर रोक लगाने की माँग हुई।

देशभर में एनआरसी लागू करने की कवायद, समान नागरिक संहिता और कश्मीरी जनता की स्वायत्तता और आत्मनिर्णय के अधिकार को छीन कर कई महीने से जनता को बंधक बनाने का विरोध किया गया है।

आर्थिक उदारीकरण की नीतियों की गति तेज कर मेहनतकश छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से वंचित करने, पाठ्य कोर्स से तर्कशीलता गायब करने, फीसों में लगातार भारी वृद्धि के खिलाफ जेएनयू के छात्रों की अग्रणी भूमिका से चलने वाले आंदोलन को समर्थन देने के साथ शिक्षा परिसरों से पुलिस व अर्धसैनिक बलों को हटाने की माँग की गई है।

महिलाओं के साथ हृदय विदारक घटनाओं के बढ़ने के क्रम में तेलंगाना में दिव्या के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म हत्या जैसी घटनाओं को रोकने और ऐसी घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने की मुखालफत करते हुए महिला मुक्ति के संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।

छंटनी-लेऑफ़-बंदी के ख़िलाफ़ रेलवे, तेलंगाना रोडवेज, होंडा मानेसर, भगवती प्रोडक्ट्स माइक्रोमैक्स, एमकोर सहित समस्त जारी आन्दोलनों को समर्थन दिया गया।

मासा का मानना है कि आज के कठिन समय मे जब मज़दूर मेहनतकशों पर लगातार हमले तेज हो रहे हैं, ऐसे में सतत आंदोलनों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में एक दिवसीय सालाना हड़ताल महज अनुष्ठान है। इसके बावजूद 8 जनवरी 2020 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान को मासा ने समर्थन दिया है।

कन्वेंशन में कॉम संजय सिंघवी, महासचिव TUCI, अमित मज़दूर सहयोग केंद्र गुड़गांव, मुन्ना प्रसाद इंकलाबी मज़दूर केंद्र, सुदेश कुमारी जन संघर्ष मंच हरियाणा, कुशल देवनाथ, SWCC पश्चिम बंगाल, रामनिवास मारुति मज़दूर आंदोलन, कनाई बर्नवाल IFTU सर्वहारा, सतीस कर्नाटक श्रमिक शक्ति, ओ पी सिन्हा AIWC, सतीश, तमिलनाडु SWC, मुकुल मज़दूर सहयोग केंद्र उत्तराखंड, आर मानसैया, उपाध्यक्ष TUCI, सव्यसाची, TUCI ओड़िसा राज्य सचिव आदि ने वक्तव्य दिए। अध्यक्षता: राजेन्द्र प्रसाद बारिक ने की, जबकि प्रस्ताव कॉमरेड शिवराम ने प्रस्तुत किया।

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