टाटा मोटर्स वीआरएस लाने की तैयारी में।

गहराती आर्थिक मंदी के हवाले से टाटा मोटर्स अपने करीब 1600 कर्मचारियों की वीआरएस जरिए निकालने की योजना लाने वाली है। कम्पनी का तर्क है कि गहराती आर्थिक मंदी की वजह से उसका एम्पलाई कॉस्ट बढ़ गया है। ऐसा कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है।

सितंबर की तिमाही के दौरान कंपनी की कर्मचारी लागत कुल बिक्री का 10.7% प्रतिशत हो गया है जो एक साल पहले 5.9% था । इस तिमाही के दौरान, टाटा मोटर्स की शुद्ध बिक्री एक साल पहले से 44% कम हो गई, और क़रीब 1,281.97 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ।

टाटा मोटर्स ने अभी हाल ही में जगुआर लैंड रोवर सेगमेंट के उत्पादन में लगे अतिरिक्त कर्मचारियों को निकाला था। फ़िलहाल कंपनी इस वीआरएस स्कीम को अपने सभी प्लांटों और विभिन्न स्तरों पर लागू करेगी। इस स्किम को कंपनी ने प्रोडक्शन और इंजीनियरिंग विभाग लागू करने का फैसला किया है।

भारी और मध्यम वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में कंपनी की कुल बिक्री में 41.2% की गिरावट आई है। BS VI मानदंडों की शुरुआत के बाद, भारी और मध्यम वाणिज्यिक वाहनों की मांग में और गिरावट आने की संभावना है।

गौरतलब है कि इसी गहराती आर्थिक मंदी और कर्मचारी लागत बढ़ने के बहाने से होंडा मानेसर प्लांट ने अस्थाई श्रमिकों की छंटनी कर रखी है। हाल ही में टाटा मोटर्स में ब्लॉक क्लोजर की संख्या 39 दिनों से बढ़ाकर 54 दिन कर दी गई।

Live Mint से इनपुट के साथ

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