एनटीपीसी के 13,000 श्रमिकों ने विनिवेश के खिलाफ निकाला कैंडल मार्च

एनटीपीसी में कार्यरत हैं 19,000 कर्मचारी

नई दिल्ली। 13,000 से अधिक एनटीपीसी के कर्मचारियों ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ सड़कों पर मार्च किया। उन्होंने एनटीपीसी के प्रस्तावित विनिवेश के विरोध में सपरिवार कैंडल मार्च निकाला।


एनटीपीसी एक्जिक्यूटिव्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनईएफआई) के अध्यक्ष वीके शर्मा ने कहा, “ एनटीपीसी में निवेश को लेकर प्रबंधन ने मजदूर यूनियनों के साथ औपचारिक रूप से बातचीत नहीं की है। हालांकि, अनौपचारिक रूप से हर कोई जान रहा है कि एनटीपीसी में विनिवेश की रणनीति तैयार की जा रही है। वर्तमान हालात को देखते हुए कर्मचारी डरे हुए हैं। उन्हें लग रहा है कि पीएसयू सेक्टर को जिस तरह से बेचा जा रहा है, उससे तय है कि आने वाले समय में एनटीपीसी पर भी सरकार की अपनी निगाह गड़ाए है।


देश भर के 50 एनटीपीसी इकाईयों में विनिवेश के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला गया। एनटीपीसी लिमिटेड में 50 इकाइयाँ हैं और ये सभी विनिवेश का विरोध करने के लिए मार्च में हिस्सा ले रहे हैं। “13,000 अधिकारियों के अलावा, गैर-अधिकारी भी विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। यह पहली बार है कि कर्मचारियों ने एनटीपीसी में इतनी बड़ी संख्या में काम किया। एनटीपीसी कार्यालयों में गेट मीटिंग हुई।


एनटीपीसी एक्जिक्यूटिव्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनईएफआई) के अध्यक्ष वीके शर्मा का कहना है कि 13 नवंबर को प्रबंधन के साथ एक बैठक हुई, जिसमें प्रबंधन ने इस बात से इनकार किया है कि उन्हें विद्युत मंत्रालय द्वारा विनिवेश को लेकर किसी तरह का प्रस्ताव मिला है। उन्होंने कहा, हमने कई बार बिजली मंत्री आर के सिंह के साथ बैठक करके उनसे विनिवेश को लेकर बातचीत के संबंध में जानना चाहा, लेकिन उनके पास समय नहीं है। जबकि, मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार एनटीपीसी में से अपनी 54.50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाह रही है।

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