असम में भोजन कर्मियों ने घेरा शिक्षा मंत्री का आवास

असम प्राइमरी और अपर प्राइमरी मिडडे मील कुक एंड हेल्पर एसोसिएशन ने अपनी मांगों के समर्थन में 12 नवंबर  को असम शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य के घर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मियों की मुख्य मांग थी कि राज्य के प्राथमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार और वितरित करने की प्रक्रिया में से गैर सरकारी संस्थानों (NGO) को तत्काल हटाया जाए, व मौजूदा श्रमिकों की नौकरी स्थायी की जाए और वेतन में प्रति माह न्यूनतम 9,600 रुपये सुनिश्चित किए जाएं।

असम सरकार ने 1 नवंबर से पंद्रह गैर सरकारी संगठनों को स्कूलों में भोजन तैयार करने और वितरित करने का ठेका दिया है। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय सरकार द्वारा 2017 में मिड डे मील के निजीकरण की नीति के तहत है, जहां सभी राज्य सरकारों को गैर सरकारी संस्थानों से केंद्रीकृत तरीके से मिड डे मील तैयार कराने का विकल्प दिया गया है।

असम में इस योजना के लागू किए जाने पर पिछले 2 हफ्तों से लगातार विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। गैर-सरकारी संगठनों पर खराब गुणवत्ता वाले भोजन परोसने और भोजन के अनियमित और असामयिक वितरण का आरोप लगने के बाद 9 नवंबर से केंद्रीकृत रसोई सेवाओं को रोक दिया गया था और आरोपों की जांच का आदेश दिया गया था। इस फैसले की प्रतिक्रिया में जहां भोजन कर्मियों ने 1 नवंबर से चल रही अपनी हड़ताल को 11 नवंबर अस्थाई रूप से स्थगित किया था, अगले दिन मज़दूर फिर एक बार आश्वासन की जगह अपनी मांगों पर पक्के फैसले और गैर सरकारी संस्थानों को पूरी तरह मिड डे मील प्रक्रिया से वर्जित करने के लिए प्रदर्शन पर उतर गए हैं।

स्कूल भोजनालय के निजीकरण से असम राज्य के 117,000 भोजन कर्मियों का रोज़गार ख़तरे में पड़ जाएगा। देश के अन्य कई राज्यों में गैर सरकारी संस्थाएं इस प्रक्रिया में शामिल हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गैर सरकारी संस्थानों द्वारा केंद्रीकृत तरीके से मिड डे मिल की तैयारी के मुकाबले स्कूल में खाना बनाने की व्यवस्था अध्यापकों और माता पिता द्वारा खाने की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण को संभव बनाती है। 

भोजन तैयार करने में लगे श्रमिकों का मुख्य हिस्सा महिलाओं का है। खाना बनाने की प्रक्रिया का निजीकरण व केंद्रीकरण स्थानीय महिलाओं के रोज़गार का एक महत्वपूर्ण साधन छीन सकती है। पिछले कुछ महीनों में असम के अतिरिक्त बिहार, त्रिपुरा, उत्तराखंड व अन्य कई प्रदेशों में भोजन कर्मियों द्वारा काम की सुरक्षा, बेहतर तनख्वाह, कामगार के दर्जे और निजीकरण पर रोक इत्यादि मांगों के लिए विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। भोजन तैयार करने में लगे श्रमिकों का मुख्य हिस्सा महिलाओं का है।

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