महिंद्रा प्रबन्धन ने यूनियन सदस्यों का काटा बोनस

पिछले संघर्ष का फोटो

महिंद्रा प्रबंधन यूनियन तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय, मजदूरों का आर्थिक क्षति के साथ लगातार उत्पीड़न जारी

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड रुद्रपुर स्थित ट्रैक्टर प्लांट में प्रबंधन ने यूनियन से जुड़े मजदूरों के बोनस/एक्सग्रेशिया में भारी कटौती कर दी है। जो मजदूर महिन्द्रा कर्मकार यूनियन के सदस्य हैं, उन्हें केवल 20 फ़ीसदी बोनस के नाम पर दिया है और बाकी मजदूरों को 50 से 60 हजार रुपये तक बोनस/एक्सग्रेशिया का भुगतान किया है।

दरअसल महिंद्रा एंड महिंद्रा में ढाई साल पहले महिन्द्रा कर्मकार यूनियन पंजीकृत हुई थी। उसके पहले प्रबंधन की एक पॉकेट कमेटी रही है, जो शिवसेना की भारतीय कामगार सेना का हिस्सा बताई जाती है।

उत्पीडन के ख़िलाफ़ बनाया यूनियन

लंबे समय से मजदूर प्रबंधन और इस कथित कमेटी की धोखाधडी के शिकार होते रहे हैं। मजदूरों के मनमाने वेतन समझौतों के साथ समझौते के एरियर और बोनस में से प्रबंधन यूनियन के नाम से एक निश्चित राशि काट लेती रही है। इन तमाम स्थितियों में मजदूरों ने अपने आपको संगठित किया और महिन्द्रा कर्मकार यूनियन पंजीकृत कराया। इससे प्रबंधन में खलबली मच गई और तबसे मजदूरों का शोषण, उत्पीड़न व दमन जारी है।

यूनियन बनने के बाद दमन हुआ तेज

दमन के द्वारा महिंद्रा प्रबंधन ने यूनियन तोड़ने के सभी प्रयास किए, लेकिन सारी परिस्थितियो को झेलकर मज़दूर फिर से खड़े हो गए और मजदूरों की नई टीम खड़ी हो गई। इससे प्रबंधन में बौखलाहट और बढ़ गई।

वर्तमान में यूनियन अध्यक्ष वीरेंद्र पाल और पूर्व कोषाध्यक्ष अमित सक्सेना को प्रबंधन ने गैरकानूनी रूप से बर्खास्त कर रखा है, हालांकि औद्योगिक न्यायाधिकरण से इसका अनुमोदन नहीं मिला है। प्रबंधन ने यूनियन पदाधिकारियों और कई मजदूरों को तरह-तरह से नोटिसें दे रखी हैं, कुछ श्रमिकों की घरेलू जांच के नाम पर, तो कुछ को एक विभाग से दूसरे विभाग स्थानांतरण के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा है। इन सबके बावजूद मजदूर एकजुटता के साथ लगातार संघर्षरत है। अपने यूनियन का झंडा भी मई दिवस के दिन लगा दिया।

महिंद्रा तीन प्लांट के संयुक्त संघर्ष का फोटो

प्रबंधन ने लगवाई नई यूनियन की फ़ाइल

दूसरी ओर प्रबंधन ने इस यूनियन को तोड़ने के लिए अपनी पॉकेट कमेटी की ओर से एक और यूनियन के पंजीकरण की फाइल लगवाई, लेकिन महिंद्रा कर्मकार यूनियन द्वारा आपत्ति के कारण वह फाइल फिलहाल अभी श्रम विभाग में विचाराधीन पड़ी है।बौखलाए प्रबंधन की सह पर उक्त कथित कमेटी और पुणे से आए शिव सैनिकों द्वारा महिंद्रा कर्मकार यूनियन के पदाधिकारियों पर हमले भी कराए गए। यह हमला रुद्रपुर में श्रम अधिकारियों के सामने हुआ था और पुलिस में शिकायत गई, इसलिए फिलहाल उक्त फाइल अभी फंस गई है।

बोनस के बहाने प्रबंधन का नया हमला

अभी बोनस के समय में प्रबंधन ने एक नया गेम खेला। उसने एक पत्र जारी किया, जिसमें कथित मंदी के बहाने साल भर में मनमाने कामबंदी के बहाने 12 छुट्टियों का अधिकार अपने हाथ में लेना चाहा, जिसमें से छह छुट्टियां कंपनी की और छह छुट्टियां मजदूरों की होंगी। उसने यह शर्त रखी कि जो इस सेवाशर्त पर हस्ताक्षर करेगा उसे ही पूरा बोनस मिलेगा।

यूनियन ने इसका विरोध किया। प्रबंधन ने अलग-अलग मजदूरों को बुलाकर डराने-धमकाने, क्षेत्रवाद आदि के द्वारा दबाव बनाने का लगातार प्रयास किया। लेकिन मजदूरों की बहुतायत संख्या इस दबाव में नहीं आई। तब प्रबंधन ने अपनी कथित पॉकेट कमेटी और प्रबंधन के दबाव में आकर उक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले मज़दूरों को 50 से 60 हजार रुपये तक बोनस/एक्सग्रेसिया के रूप में दिया। जबकि मजदूरों की भारी आबादी को उसने महज औसतन 24000 रुपए का ही भुगतान किया। इस आर्थिक क्षति के बावजूद मजदूर एकजुट है और लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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श्रम विभाग ने जारी किया नोटिस

इस दौरान यूनियन की शिकायत पर श्रम विभाग ने भी प्रबंधन को नोटिस जारी किया है, क्योंकि औद्योगिक विवाद और संराधन कार्यवाही के दौरान सेवा शर्तों को बदलना या दबाव बनाना कानूनन गलत है। इसी के साथ यूनियन ने अनुचित श्रम व्यवहार का मुद्दा भी उठा रखा है, क्योंकि एक ही प्लांट के अलग-अलग मज़दूरों को बोनस/एक्सग्रेशिया के भुगतान में भिन्नता रखना और श्रमिकों को आर्थिक क्षति पहुँचाना अनुचित है।

इन हालात में महिंद्रा कर्मकार यूनियन जो कि कंपनी की एकमात्र पंजीकृत यूनियन है के बैनर तले मजदूरों की बड़ी आबादी संगठित है और दमन सह कर भी उनका संघर्ष जारी है।

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