इस सप्ताह उदय प्रकाश की पांच कविताएं !

मारना / उदय प्रकाश

आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं सोचता.

आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता.

कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर जाता है.


दुआ / उदय प्रकाश

हुमायूँ ने दुआ की थी
अकबर बादशह बने

अकबर ने दुआ की थी
जहाँगीर बादशाह बने

जहाँगीर ने दुआ की थी
शाहजहां बादशाह बने

बादशाह हमेशा बादशाह के लिए
बादशाह बनने की दुआ करता है

लालक़िले का बूढ़ा दरबान
बताता है ।


रंगा-बिल्ला / उदय प्रकाश

एक था रंगा
एक था बिल्ला

दोनों भाई-भाई नहीं थे
लेकिन दोनों को फाँसी हो गयी ।

एक थे टाटा
एक है बिरला

दोनों भाई-भाई हैं
लेकिन दोनों को फाँसी नहीं हुई ।


शरारत / उदय प्रकाश

छत पर बच्चा
अपनी माँ के साथ आता है.

पहाड़ों की ओर वह
अपनी नन्हीं उंगली दिखाता है.

पहाड़ आँख बचा कर
हल्के-से पीछे हट जाते हैं
माँ देख नहीं पाती.

बच्चा
देख लेता है.

वह ताली पीटकर उछलता है
–देखा माँ, देखा
उधर अभी
सुबह हो जाएगी.


घोड़े की सवारी / उदय प्रकाश

लड़का उसे बड़ी देर से
घोड़ा कहकर
उसकी टाँगों पर
चढ़ रहा था ।

वह लेटा हुआ था पीठ के बल ।
बायें घुटने पर
दायीं टाँग थी
जो लड़के लिए घोड़े की
पीठ थी ।

उसके पैर के अँगूठे को लड़का
घोड़े के कान की तरह
ऎंठ रहा था ।

उसने टाँगें हिलाईं धीरे से कि
लड़का गिरे नहीं
‘चला घोड़ा, चला’ लड़के ने
ताली पीटी और जीभ से
चख-चख की आवाज़ निकाली ।

उसके सिर में दर्द था सुबह से ही
वह सोना चाहता था तुरत
लेकिन लड़के ने घंटे भर से उसे
घोड़ा बना रखा था

अचानक लड़का गिरा फ़र्श पर
उसका माथा दीवार से टकराज़ा
उसे लगा, लड़के को
चोट ज़रूर आई होगी

उसने वापस आदमी होने की
कोशिश की और
उठकर बैठ गया ‘

वह लड़के को चुप कराना
चाहता था ‘

लेकिन उसके गले में से
थके हुए घोड़े की
हिनहिनाहट निकली सिर्फ़ !



कवि : उदय प्रकाश
जन्म : १ जनवरी १९५२

प्रकाश का जन्म मध्य प्रदेश में स्थित शहडोल जिले के सीतापुर गाँव में हुआ। इनका बालपन और प्राथमिक शिक्षा यहीं पूर्ण हुई। इन्होने विज्ञान में स्नातक डिग्री तथा स्वर्ण पदक सहित सागर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।  १९७५ से १९७६ तक वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में एक शोध छात्र रहे।

चर्चित कवि, कथाकार, पत्रकार और फिल्मकार हैं। आपकी कुछ कृतियों के अंग्रेज़ी, जर्मन, जापानी एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद भी उपलब्ध हैं। लगभग समस्त भारतीय भाषाओं में रचनाएं अनूदित हैं। ‘उपरांत’ और ‘मोहन दास’ के नाम से इनकी कहानियों पर फीचर फिल्में भी बन चुकी हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। उदय प्रकाश स्वयं भी कई टी.वी.धारावाहिकों के निर्देशक-पटकथाकार रहे हैं। भारतीय कृषि का इतिहास पर महत्वपूर्ण पंद्रह कड़ियों का सीरियल ‘कृषि-कथा’ राष्ट्रीय चैनल के लिए निर्देशित कर चुके हैं।


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