2 दिन में बीएसएनएल के 22 हजार कर्मचारियों को दी गई वीआरएस

सरकारी विभाग को पहले कंपनी बनाया और अब बेच रही है सरकार

नई दिल्ली। सरकार कैसे पूंजीपतियों के हाथों बिक चुकी है ? इसका सबसे अच्छा उदाहरण है बीएसएनएल। सरकारी दूरसंचार विभाग को सबसे पहले सरकार ने एक कंपनी में तब्दील किया। इसके बाद इसे घाटे में ले गई। और अब कंपनी के कर्मचारियों को वीआरएस देकर विभाग को पूरी तरह से बंद करना चाहती है या किसी पूंजीपति को औनपौने दामों पर बेच देना चाहती है।

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बीएसएनल की तरफ से कर्मचारियों के लिए जबरदस्ती वीआरएस (स्वैच्छिक रिटायरमेंट) दिया जा रहा है। वेतन रोक कर परेशान करने वाली सरकार के आगे झुकते हुए 22 हजार कर्मचारियों ने इसके लिए अप्लाई भी कर दिया है। बीएसएनएल में करीब 1 लाख कर्मचारी वीआरएस लेने के योग्य हैं। अगर यह चले जाएंगे तो बीएसएनएल चलेगा कैसे ? सरकार 7 हजार करोड़ रूपये किसके लिए बचा रही है ? इससे देश का क्या भला होगा ? पता नहीं, लेकिन अंबानी की जीओ दुकान दौड़ पड़ेगी। तो क्या यह सब अंबानी के लिए किया जा रहा है। वह भी ऐसे समय में जब दुनिया के सभी देशों में दूरसंचार विभाग मोटे मुनाफे वाला सेक्टर है। बीएसएनएल पर भी लोगों को खूब विश्वास था, लेकिन चरणबद्ध तरीके से सरकार ने इसे बर्बाद कर दिया।

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सरकार को उम्मीद है कि 70 से 80 हजार कर्मचारी वीआरएस ले लेंगे, जिससे वेतन के 7 हजार करोड़ रुपए सरकार बचा सकेगी। 50 साल से अधिक उम्र के सभी कर्मचारी इस स्कीम के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकते हैं।


बीएसएनएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पीके पुरवर का कहना है कि यह स्कीम 5 नवंबर से 3 दिसंबर तक लागू रहेगी। इस स्कीम के बारे में कर्मचारियों को जानकारी देने के बारे में सभी फील्ड यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं। बीएसएनएल के कुल 1.50 लाख कमचारियों में तकरीबन एक लाख कर्मचारी वीआरएस लेने की योग्यता रखते हैं।

महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड ने भी अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस थमाना शुरू कर दिया है।यह स्कीम वीआरएस के गुजरात मॉडल पर आधारित है।

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