लम्बे संघर्ष के बाद एडविक मज़दूरों को मिली जीत

मज़दूर की कार्यबहाली व वेतन समझौते के साथ यूनियन को मिली मान्यता

पंतनगर (उत्तराखण्ड)। एडविक हाईटेक, सिडकुल, पंतनगर में डेढ़ साल के लम्बे संघर्ष के बाद आज 8 नवम्बर को मज़दूरों को जीत मिली है। सहायक श्रमायुक्त की मध्यस्तता में हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत बर्खास्त श्रमिक राजू विश्वास की कार्यबहाली, 5 साल के लिए 12,500 रुपये की वेतन बृद्धि के साथ यूनियन को मान्यता मिल गयी है। साथ ही वर्ष 2018 के लिए 11,500 रुपये एक मुस्त देने का समझौता भी हुआ। इस जीत से मज़दूरों में खुशी की लहर दौड़ गयी।

समझौते से मज़दूरों को मिला लाभ

एडविक कर्मचारी संगठन और एडविक प्रबंधन के बीच 5 वर्षीय वेतन समझौता 12500 सीटीसी में हुआ। समझौता 1 अप्रैल 2019 से 30 अप्रैल 2024 तक लागू होगा। समझौते के तहत प्रथम वर्ष में 40%, द्वितीय वर्ष में 30% बा अन्य 3 वर्ष में 10%, 10%, 10%की वेतन वृद्धि होगी।

2018 की एकमुश्त राशि 11500 रुपए के एरियर का सारा पैसा 10 दिसंबर 2019 तक श्रमिकों के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा।

बर्खास्त राजू विश्वास की कार्य बहाली 11/11 /2019 से होगी। 6 महीने बाद राजू विश्वास को भी यूनियन के अन्य सदस्यों के भांति लाभ मिलेगा।

समझौते के बाद बैनर उतरते प्रबंधन व मज़दूर

यूनियन बनने से खफा प्रबन्धन ने तेज किया था उत्पीड़न

ज्ञात हो कि एडविक कंपनी में डेढ़ साल पूर्व एडविक कर्मचारी संगठन पंजीकृत होने के बाद से प्रबन्धन ने यूनियन सदस्यों की वार्षिक वेतन बृद्धि रोक दी थी और श्रमिक उत्पीड़न बढ़ाते हुए कार्यकारिणी सदस्य राजू विश्वास की ग़ैरकानूनी गेटबन्दी कर दी थी। तबसे मजदूरों का संघर्ष जारी है।

दो बार हुए समझौते से मुकर चुका था प्रबन्धन

पिछले साल श्रम भवन पर चले धरने के वक़्त सहयक श्रमायुक्त ने त्रिपक्षीय समझौता कराया था और एएलसी व पुलिस चौकी इंचार्ज ने जूस पिलाकर आंदोलन समाप्त कराया था। बाद में प्रबंधन समझौते से मुकर गया। पुनः दूसरे संघर्ष में एएलसी ने एक और समझौता कराया, लेकिन प्रबन्धन उससे भी मुकर गया। न तो राजू की कार्यबहाली हुई, न ही वेतन बढ़ा।

मज़दूरों ने आन्दोलन किया था तेज

ऐसे में मज़दूरों ने गेट पर धरना कार्यक्रम के साथ आन्दोलन को नई गति दी। बीते 8 जुलाई को कम्पनी गेट पर जैसे ही धरना शुरू हुआ था, पुलिस फोर्स के साथ पुलिस अधिकारियों ने पहुँचकर मजदूरों को धमकाने व हटाने का प्रयास किया। मजदूरों ने उनके जूस पिलाने की फोटो दिखाकर सवाल पूछा तो कोई जवाब नही निकला। मज़दूरों के दो टूक जवाब से उनका भी रौब काम नहीं आया।

तबसे मज़दूरों का संघर्ष लगातार आगे बढ़ता रहा। इस बीच श्रम विभाग में कई दौर की वार्ताएं चलीं। प्रबन्धन मज़दूरों पर लगातार दबाव बनाता रहा।

और समझौता संम्पन्न, मिली जीत

अन्ततः आज 8 नवम्बर को समझौता सम्पन्न हुआ। इस समझौते की सबसे बड़ी कामयाबी एक बर्ख़ास्त श्रमिक की पुनःनियुक्ति पर कार्यबहाली और यूनियन को मान्यता मिलाना है।

समझौते पर सहायक श्रमायुक्त व प्रबंधन के साथ यूनियन अध्यक्ष विवेक जोशी, कोषाध्यक्ष राजू सिंह, उपाध्यक्ष दयाराम, संयुक्त मंत्री सुधीर कुमार, संगठन मंत्री राकेश कुमार, प्रचार मंत्री आनंद गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य विकल कुमार व राजूविश्वास ने हस्ताक्षर किए।

इस जीत पर एडविक कर्मचारी संगठन के सभी संघर्षशील साथियों को मज़दूर सहयोग केन्द्र ने बधाई दी है।

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: