बीएसएनएल में स्वैच्छिक नहीं जबरिया सेवानिवृत्ति योजना

सरकारी दूरसंचार कंपनियों से 50 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी क्यों?

मोदी-2 सरकार सरकारी कर्मचारियों की छंटनी की तमाम योजनाएं तेजी से लागू कर रही हैं। 50 साल उम्र या 30 साल नौकरी वालों को निकालने का धंधा तेज करने के साथ ही सरकार अन्य तरीके भी बेशर्मी से लागू कर रही है। इसी क्रम में उसने बीएसएनएल और एमटीएनएल के पचास फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। इससे करीब 80 हज़ार कर्मचारी बाहर होने वाले हैं।

छटेंगे कर्मचारी, बिकेंगी संपत्तियां

सरकार ने पिछले हफ्ते ही घाटे के बहाने दूरसंचार क्षेत्र की दोनो सार्वजानिक कंपनियों – बीएसएनएल और एमटीएनएल के आपस में विलय के साथ इनके कर्मचारियों की संख्या आधी करने के लिए उन्हें स्वैच्छिक (जबरिया) सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) का फैसला किया था।

सरकार की कथित पुनरुद्धार योजना के मुताबिक, एमटीएनएल का बीएसएनएल में विलय किया जायेगा। कर्मचारियों के लिए वीआरएस योजना लायी जायेगी। बीएसएनएल के पुनरुद्धार के लिए 15 हजार करोड़ रुपये के सॉवरेन बॉन्ड लाये जायेंगे। 38 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियां बेची जायेंगी। विलय प्रक्रिया पूरी होने तक एमटीएनएल, बीएसएनएल की सब्सिडियरी रहेगी। साथ ही, बीएसएनएल-एमटीएनएल को 4जी स्पेक्ट्रम दिये जाने पर भी सहमति जतायी गयी है।

करीब सवा लाख कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार

इसके तहत अभी बीएसएनएल और एमटीएनएल के 1.59 लाख कर्मचारियों में से 53.5 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 80 हजार कर्मियों को वीआरएस देने की तैयारी है।

ज्ञात हो कि जून 2019 में बीएसएनएल में कुल 1.65 लाख कर्मचारी हैं, जिनमे से 1.16 लाख कर्मचारी छंटनी की जद में हैं। वही एमटीएनएल में 21679 कर्मचारियों में से 19 हजार पर छंटनी की तलवार लटकी है।

बेहद कम पैकेज, वह भी दो किश्तों में मिलेगी

वीआरएस के तहत कर्मचारियों को दो किश्तों में एकमुश्त अनुग्रह राशि (एक्सग्रेसिया) सहायता दी जाएगी। ये राशि उनके बाकी सेवाकाल में देय कुल वेतन के सवा गुना के बराबर होगी। इसका भुगतान 2019-20 और 2020-21 के दौरान दो बार में होगा।

इसमें दो विकल्प हैं- एक के तहत कर्मचारियों को एकमुश्त अनुग्रह राशि के साथ नियमित पेंशन का लाभ मिलेगा। दूसरे के तहत 60 वर्ष की पूर्ण सेवाकाल के अनुसार शेष बचे महीनों के वेतन का सवा गुना वेतन एकमुश्त दिया जाएगा।

ग्रेच्चुटी भुगतान भी 60 साल उम्र होने पर

वीआरएस के तहत ग्रेच्चुटी तत्काल नहीं मिलेगी। इसका भुगतान 60 वर्ष की उम्र पूरी होने अथवा रिटायर होने के 5 वर्ष बाद (जो भी पहले हो) किया जाएगा यह ज़रूर जोड़ दिया गया है कि बीच में कर्मचारी की मौत होने पर ग्रेच्चुटी मिल जाएगी। यानी नौकरी भी गई और ग्रेच्चुटी भी बाद में मिलेगी।

जिओ के लाभ के लिए सरकारी कंपनियों की तबाही

दूरसंचार की दूसरी निजी कंपनियों को एक्स्पेक्ट्रम देने वाली सरकारी कम्पनियाँ यूँ ही बर्बाद नहीं हुई हैं, इसकी पूरी एक गाथा है।

करीब तीन दशक पहले, जब उदारीकरण का दौर शुरू हुआ, तबसे अन्य सरकारी विभागों की तरह दूरसंचार विभाग की भी सचेतन बर्बादी शुरू हुई। पहले यह दूरसंचार विभाग था, फिर इसे बर्बाद करने/निजिकरण के लिए 3 निगमों- बीएसएनएल, एमटीएनएल व वीएसएनएल में बांटा गया, बाद में वीएसएनएल टाटा के हवाले हुआ, बाकी दोनों को बर्बाद करते हुए यहाँ तक लाया गया।

मोदी सरकार के दौर में रिलायंस जिओ को सीधे लाभ पहुँचाने के लिए इस लाभकारी सरकारी कंपनियों को सचेतन घाटे में पहुँचा दिया, यहाँ तक कि कर्मचारियों के वेतन तक के लाले पड़ गए। और अब दोनों कंपनियों के विलय के बहाने छंटनी की तलवार चला दी। इसकी संपत्तियां बेचीं जा रही है। अंत में इसे निजी कम्पनी के हवाले कर दिया जाना है।

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