तेलंगाना: परिवहन निगम की हड़ताल 24वें दिन जारी

एक और कर्मचारी ने आत्महत्या की, अब तक चार ने की आत्महत्या

हैदराबाद: सरकार में विलय सहित विभिन्न मांगों को लेकर तेलंगाना में बीते पांच अक्टूबर से राज्य सड़क परिवहन निगम के 48 हज़ार से अधिक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. अब तक चार कर्मचारियों के आत्महत्या कर लेने की सूचना है.

पुलिस आयुक्त तफसीर इकबाल ने बताया, ‘महिला कंडक्टर नीरजा ने रविवार की रात यह कदम उठाया. वह सथुपल्ली डिपो में काम करती थीं.’ अधिकारी ने बताया, ‘हमें अभी पता चला है कि उसने आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या के कारण का अभी तक पता नहीं चल सका है.’

इस महीने की पांच तारीख से अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे निगम के कर्मचारी नीरजा के घर के बाहर एकत्र हुए और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. पंजाब केसरी के मुताबिक पुलिस ने बताया कि नीरजा (37) अपने पति और दो बच्चों के साथ अपने मायके पालेगुड़ेम दीपावली मनाने गई थीं. हड़ताल में शामिल होने संबंधी सूचना मिलने के बाद वह घर वापस आ गई थीं और रविवार की रात कथित तौर पर आत्महत्या कर ली.

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और घटना की जांच कर रही है. बीते पांच अक्टूबर को हड़ताल शुरू होने के बाद से टीएसआरटीसी के कर्मचारी द्वारा आत्महत्या की यह चौथी घटना है. इससे पहले अपनी मांगों को सरकार न मानने को लेकर नाराज होकर खम्मम से दो कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली थी.

बस चालक श्रीनिवास रेड्डी ने 12 अक्टूबर को अपने घर में आत्मदाह कर लिया था. उसके बाद करीब 50 वर्षीय एक परिचालक सुदर्शन गौड़ ने 13 अक्टूबर को अपने घर पर फांसी लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. बताया जा रहा है कि वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के उस बयान से तनाव में आ गए थे, जिसमें उन्होंने हड़ताल में शामिल सभी कर्मचारियों को हटाने की बात कही थी.

इनके अलावा हैदराबाद और नलगोंडा से एक-एक आत्महत्या के मामले सामने आए थे. बीते 26 अक्टूबर को नलगोंडा में 53 वर्षीय वेंकटेश्वरर्लु ने जहर खाकर अपनी जान दे दी थी. वह नरकेटपल्ले आरटीसी डिपो में बतौर ड्राइवर कार्यरत थे.

गौरतलब है कि तेलंगाना टीएसआरटीसी के लगभग 48 हजार कर्मचारी और कार्यकर्ता विभिन्न मांगों को लेकर संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) के आह्वान पर पांच अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. सरकारी बसों के सड़कों से नदारद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

टीएसआरटीसी के सरकार में विलय, वेतन समीक्षा, विभिन्न पदों पर भर्ती समेत कई मांगों को लेकर संयुक्त कार्य समिति ने हड़ताल का आह्वान किया था जिसके बाद पांच अक्टूबर से टीएसआरटीसी के कर्मचारी संघ और विभिन्न कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे.

इस मामले पर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने सख्त रुख अपना रखा है और साफ कर दिया है कि टीएसआरटीसी का सरकार में विलय नहीं होगा. मुख्यमंत्री राव ने कहा था कि आंदोलनरत कर्मचारी खुद ही बर्खास्त हो गए हैं. साथ ही मुख्यमंत्री ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से बातचीत करने से भी साफ मना कर दिया था.

मुख्यमंत्री ने कहा था कि टीएसआरटीसी के सरकार में विलय की मांग अतार्किक हैं. अगर ऐसा किया जाता है तो 57 अन्य निगम ऐसी ही मांग करने लगेंगे. टीएसआरटीसी कर्मचारियों के समर्थन में दो दिन पहले अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे भाकपा के पूर्व विधायक के साम्भाशिव राव की तबीयत बिगड़ने के कारण पुलिस ने उन्हें एक सरकारी अस्पताल भेज दिया.

पुलिस ने कहा कि शनिवार को उपवास शुरू करने वाले राव का रक्तचाप और मधुमेह का स्तर गिर गया था, जिसके चलते उन्हें सोमवार तड़के सरकार द्वारा संचालित निजाम आयुर्विज्ञान संस्थान (एनआईएमएस) में भर्ती कराया गया. हालांकि राव ने दावा किया कि वह अस्पताल में उपवास जारी रखे हुए हैं. उन्होंने खुद को अस्पताल भेजने की पुलिस कार्रवाई की निंदा की.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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