यामाहा प्रबंधन झुका, वेतन समझौता स्वीकार्य

दो बर्खास्त मजदूरों की सवेतन बहाली, यूनियन को भी मान्यता

यामाहा के मजदूरों की एक बड़ी जीत मिली है। एक साल से चल रहे हड़ताल के दबाव में यामाहा प्रबंधन ने वेतन समझौता मान लिया है। और यामाहा के यूनियन को मान्यता भी दे दिया है। दो बर्खास्त कर्मचारी को एक साल का पूरा वेतन और कंपनी में वापसी पर सहमति बन गई है। साथ ही यूनियन को फैक्ट्री में ही आॅफिस मिलेगा। मजदूरों के हितार्थ दूसरी कल्याणकारी योजनाएं भी कंपनी चलाएगी।


13 सितंबर 2019 को यामाहा प्रबंधन ने भारत के यामाहा मोटर थोजिल्लार संगम के साथ वेतन व यूनियन को मान्यता देने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है। 21 सितंबर 2018 से चल रही यामाहा मोटर की सबसे बड़ी हड़ताल को भारी सफलता मिली है। इस एकजुट और दृढ आंदोलन के कारण न सिर्फ संघ को मान्यता मिल गई है, बल्कि प्रबंधन ने दो श्रमिकों की बर्खास्तगी को भी रद्द कर दिया है। दोनों श्रमिक कामरेड राजा मणिकंदन और कामरेड प्रकाश को हड़ताल के दौरान श्रम विभाग में सुलह बैठक में शामिल होने के आरोप में यामाहा प्रबंधन ने कंपनी से निकाल दिया था।


निराशा और हताशा के समय में यह श्रमिकों और ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है। हड़ताल के दौरान पिछले साल 55 दिनों तक चली रॉयल एनफील्ड और एमएसआई के मजदूरों के अलावा इस क्षेत्र के विभिन्न श्रेणियों के मजदूरों के हड़ताल का भी समर्थन किया गया। हड़ताली मजदूरों के प्रति एक जुटता बनाई गई।

कामरेड राजा मणिकंदन और कामरेड प्रकाश


यामाहा प्रबंधन दोनों श्रमिकों की बर्खास्तगी को रद्द करने के साथ ही उनकी विभागीय जांच को भी खतम करने पर सहमत हो गया है। सीटू के नेता कॉमरेड कन्नन का कहना है कि दोनों श्रमिकों को पिछले एक साल के दौरान पूरा वेतन देने पर प्रबंधन समहत हो गया है। जुलाई 2019 में प्रबंधन ने यूनियन को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसे वापस ले लिया गया है। यूनियन और प्रबंधन के बीच सामूहिक वेतन को लेकर बातचीत संपन्न हो गई है।


वेतन समझौता 2019 से 2022 तक यानी तीन साल के लिए लागू हुआ है। वेतन समझौते के तहत अब वेतन वृद्धि तीन वर्षों में 14,000 से 19,000 रुपये के बीच होगी। प्रबंधन मजूदरों के लिए कैंटीन में भोजन की व्यवस्था के साथ ही मजूदरों के हितार्थ कार्यस्थल पर कई प्रकार के सुधार करेगा। साथ ही फैक्ट्री के अंदर ही यूनियन को कार्यालय खोलने के लिए एक जगह आवंटित करेगा। यूनियन के पदाधिकारियों को यूनियन के गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रतिदिन 2 घंटे की छुट्टी दी जाएगी।


कॉमरेड कन्नन का कहना है कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र की स्थिति और आर्थिक हालत को देखते हुए यह वेतन समझौता काफी मायने रखता है। संघर्ष की सबसे महत्वपूर्ण ताकत संघ की मान्यता और श्रमिकों की बहाली है। इस बात पर जोर देने की जरूरत है कि श्रमिकों की सामूहिक ताकत के कारण ऐसा हुआ है।


हालांकि, अभी भी संघ में बाहरी पदाधिकारियों को शामिल करने को लेकर प्रबंधन व संघ के बीच विवाद बना हुआ है। यामाहा मोटर्स थोजिलालार संगम में सीटू के नेता इसके बाहरी पदाधिकारी हैं। संघ सीटू से संबद्ध है।


संघ में बाहरी पदाधिकारियों से यूनियन को कोई नुकसान नहीं है। क्योंकि, कई बार कंपनी के बाहर के मजदूर नेता यूनियन को काफी बेहतर तरीके से चलाते हैं। वह कंपनी व मजदूरों दोनों के हितों की सोचते हैं। लेकिन, यामाहा प्रबंधन का मानना है कि केवल कंपनी के कर्मचारी ही संघ के पदाधिकारी हो सकते हैं। वहीं, वेतन वृद्धि समझौते में भी विभेद है। हालांकि, संघ ने निर्णय लिया है कि इसे व्यक्तिगत आधार पर सुलझाने का प्रयास करेगा।

टीएन लेबर से साभार

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