ध्वस्त होने के कगार पर है भारतीय अर्थव्यवस्था

गिरीश मालवीय की राय उनके फेसबुक वाल से

इंडिया बुल्स ओर DHFL जैसी बड़ी NBFC कंपनियों के बारे मे लगातार आपको आगाह कर रहा हूँ । कल स्टेंडर्ड एंड पूअर्स ग्लोबल रेटिंग्स ने भी कहा है कि भारतीय वित्तीय क्षेत्र में संक्रामक छूत जैसी परिस्थिति पैदा हो गई हैं, जैसे ही कोई बड़ी फाइनैंस कंपनी विफल हो रही है, इसका प्रतिकूल प्रभाव आर्थिक विकास पर देखने को मिल रहा है ।


भारत की फाइनैंस कंपनिया देश के सबसे बड़े कर्जदारों में से हैं। इनकी फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा बैंकों से आता है। किसी भी बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की विफलता कर्जदाताओं को झटका दे सकती है । इंडिया बुल्स की बात करे तो सिटीजन WHISTLEBLOWER FORUM ने 2 दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इस जवाब में याचिकाकर्ता ने इंडियाबुल्स के यस बैंक के साथ कारोबार पर सवाल उठाए हैं। इस जवाब में कहा गया है कि 2009 से 2019 तक यस बैंक ने इंडियाबुल्स को लोन दिया।


इसके अलावा 14 कंपनियों को 5,698 करोड़ का लोन दिया गया। इनमें से कई कंपनियों की नेटवर्थ निगेटिव थी। कई कंपनियों का कोई कारोबार ही नहीं था। इसके साथा ही इंडियाबुल्स ने राणा कपूर और राणा कपूर के परिवार से जुड़ी 7 कंपनियों को 2,034 करोड़ का लोन दिया। इन 7 कंपनियों ने रिटर्न तक फाइल नहीं किया है ।


ठीक ऐसी ही बल्कि इससे बुरी स्थिति DHFL की बताई जा रही है । यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने KPMG को अप्रैल 2015 से मार्च 2019 तक की अवधि के लिए DHFL का स्पेशल रिव्यू करने को कहा था। मार्च के अंत में कंपनी के लोन और अडवांस का कुल आंकड़ा 97,977 करोड़ रुपये था।


KPMG ने पाया कि DHFL ने करीब 25 ऐसी ग्रुप कंपनियों को 14,000 करोड़ रुपये का लोन दिया है । जिनका औसतन मुनाफा 1 लाख रुपया ही रहा है । फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि उक्त 25 समूहों पर कंपनी का बकाया कर्ज करीब 13,000 करोड़ रुपये का है । इनमें से 15 कंपिनयों को दिया गया 7,000 करोड़ रुपये का लोन गैर निष्पादित परिसंपत्ति0 (NPA) में नहीं बदला गया ।


डीएचएफएल के ऊपर कुल कर्ज 83,873 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 38,000 करोड़ रुपये उसे बैंकों को देने हैं PMC बैंक को डुबोने वाली HDIL और DHFL दोनों कंपनियों के मालिक सगे रिश्तेदार हैं । कंपनी का आर्थिक सेहत बिगड़ चुकी है । इसके शेयर की कीमत पिछले डेढ़ साल में 650 रुपये से गिरकर 19 रुपये के आसपास पहुंच गई है । इंडियाबुल्स समूह में निजी और सरकारी बैंकों का करीब 27,580 करोड़ रुपये फंसा हुआ है ।


यह कर्ज और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर के रूप में है । इंडियाबुल्स के प्रमोटर वित्तीय अनियमितता के आरोपों का सामना कर रहे हैं । सबसे ज्यादा पैसा भारतीय स्टेट बैंक का है जिसके 8,100 करोड़ रुपये दांव पर हैं । बैंक ऑफ बड़ौदा के (विजया बैंक और देना बैंक सहित) 6,460 करोड़ रुपये फँसे हुए हैं ओर संकट में चल रहे यस बैंक के भी इसमें 6,040 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं । यस बैंक के कुल नेटवर्थ का एक चौथाई इंडियाबुल्स समूह में फंसा हुआ है एक साल में इंडिया बुल्स का शेयर 70 फीसदी तक गिर चुका है ।


इन दोनों बड़ी कंपनियो का इस तरह का प्रर्दशन भारतीय बैंकिंग की कमर तोड़ देगा, क्योकि इस डूबी हुई रकम को NPA तक दिखाया नही गया है ओर इतने बड़े डिफॉल्ट अभी हुए नही है जिसमे लगभग 25-25 हज़ार करोड़ जैसी रकम इन्वॉल्व हो ।

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