विकास का मतलब इन्सान नहीं गाय को बचाओ

भुखमरी और कुपोषण में पिछड़ते देश में ‘पहली रोटी गाय को’ अभियान

गजब है मोदी-योगी का भाजपाई राज! एक तरफ देश विश्व भुखमरी सूचकांक में 5 सालों में 55 अंक नीचे गिरकर 103वें स्थान पर पहुँच गया, 50 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, वहीँ दूसरी ओर योगी सरकार उत्तर प्रदेश में गाय के चारे के कथित संकट का समाधान निकालने में मशगूल है। योगी सरकार ने लोगों की रसोई से गाय के लिए रोटी-गुड जुटाने के अभियान में अधिकारियों को लगा दिया है। यानी विकास के केंद्र में इन्सान नहीं जानवर है।

योगी सरकार का ‘पहली रोटी गाय को’ अभियान

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की चिंता इन्सान नहीं, गाय है। उसने ‘पहली रोटी गाय को’ अभियान शुरू किया है। सरकार ने बाकायदा जिलाधिकारी सहित आला अधिकारियों की ‘विशेष’ ज़िम्मेदारी दे दी है। इसके लिए योगी सरकार ने बजट भी आवंटित कर दिया है। इस परियोजना के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मथुरा में घर-घर से गायों के लिए रोटी एकत्र करने के लिए वाहन का उद्घाटन किया था, तो लोनी में केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह ने हरी झंडी दिखाई, फिर तो पूरे प्रदेश में यह सिलसिला चल पड़ा।

‘पहली रोटी गाय का’ अभियान मोदी के लिए इमेज परिणाम

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पिचले दिनों पडरौना जिला कलेक्ट्रेट में कुशीनगर के डीएम अनिल कुमार व नोडल अफसर डॉक्टर प्रभात कुमार की मौजूदगी में बैठक आयोजित हुई, जिसमें हर घर से रोज दो रोटी व गुड़ जुटाने का फैसला किया गया। इसकी जिम्मेदारी कुशीनगर के नगर पालिका प्रशासन को सौंपी गई है। पालिका ने इसके लिए वाहन का भी इंतजाम कर लिया है, जिसका नाम ‘पहली रोटी गाय को’ रखा गया है।

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भुखमरी सूचकांक में भारत 55 पायदान नीचे पहुँचा

गाय को रोटी का इंतेज़ाम और विकास के तमाम दावों के बीच देश में भुखमरी की शर्मनाक रिपोर्ट सामने आई है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 103वें पायदान पर है। इस सूची में भारत नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों से भी पीछे है।

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सन 2014 में ‘अच्छे दिन’ के शोर-शराबे के साथ सत्ता के शीर्ष पर पहुँचे मोदी सरकार के दौरान देश भुखमरी सूचकांक में लगातार नीचे गिरा है। यानी भुखमरी ज्यादा बढ़ी है। 2014 में भारत जहाँ 55वें पायदान पर था, तो वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें पायदान पर पहुँच गया था। इस बार रैंकिंग 3 पायदान और गिर गई और भारत 103वें स्थान पर पहुँच गया।

यही नहीं, आयरलैंड की कन्सर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की वेल्थुंगरहिल्फे ने भूख पर जो शोध किया है, उसकी ताजा रिपोर्ट में भारत को 30.3 अंक मिले, जो भुखमरी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

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देश के 50 फीसदी बच्चे कुपोषित

हालत ये हैं कि देश के 6 साल से काम उम्र के बच्चों में से 50 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।  पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूट्रेशन की जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में देश में कम वजन वाले बच्चों के जन्म की दर 21.4 फीसदी रही। जबकि जिन बच्चों का विकास नहीं हो रहा है, उनकी संख्या 39.3 फीसदी, जल्दी थक जाने वाले बच्चों की संख्या 15.7 फीसदी, कम वजनी बच्चों की संख्या 32.7 फीसदी, अनीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या 59.7 फीसदी और अपनी आयु से अधिक वजनी बच्चों की संख्या 11.5 फीसदी पाई गई थी। जबकि  कुपोषण से होने वाली मौतें 68.2 फीसदी है।

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भाजपा सरकारों का यही है विकास का माडल

तस्वीर साफ है, जिस देश में इन्सान भूख से मार रहे हों, बच्चे कुपोषित हों, वहाँ मोदी-योगी की भाजपा सरकारों की चिंता इन्सान नहीं, जानवर हैं! यही हैं भाजपाइओं के ‘अच्छे दिन’!

इसलिए जोर से बोलो जय जय जय श्रीराम!

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