मंदी से निपटने के लिए लोन किए सस्ते, ब्याज दर घटाई

मंदी से भी पूंजीपतियों को ही फायदा, जनता को नुकसान

आर्थिक व्यवस्था में आने वाले मंदी से भी पूंजीपतियों को ही फायदा मिल रहा है। एसबीआई ने एक तरफ तो लोन के दर को सस्ता कर दिया है, दूसरी ओर जनता की गाढ़ी कमाई के तौर पर जमा बचत खातों व एफडी पर ब्याज दर कर कर दिया है। बचत खाते में एक लाख रुपये तक जमा रखने वालों के लिए बैंक ने ब्याज दर 3.50 फीसदी से घटाकर 3.25 फीसदी कर दी है। नई दरें एक नवंबर से लागू होंगी।


बैंक ने एक से दो साल की अवधि के रिटेल टर्म डिपॉजिट यानी फिक्स्ड डिपॉजिट और बल्क टर्म डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज में भी कमी की है। एसबीआई ने एफडी पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कमी की है। वहीं, बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दर में 30 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इस टर्म डिपॉजिट की मियाद एक साल से दो साल तक की है।

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साथ ही एसबीआई ने एमसीएलआर की दरें 0.10 फीसदी तक घटा दी हैं, जो 10 अक्तूबर से लागू हो रहीं हैं। बता दें कि मौजूदा वित्त वर्ष में लगातार छठी बार बैंक ने दरें घटाई हैं। इस संदर्भ में एसबीआई ने कहा है कि, श्फेस्टिवल के मौके पर ग्राहकों को ज्यादा फायदा पहुंचाने के लिए बैंक ने सभी अवधि के लिए एमसीएलआर दरें 0.10 फीसदी तक घटा दी हैं। अब एक साल के लिए नई एमसीएलआर दरें 8.15 फीसदी से घटकर 8.05 फीसदी पर आ गईं हैं।

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बता दें कि चार अक्तूबर को अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयासों के क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर में लगातार पांचवीं बार कमी की थी। आरबीआई ने मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.15 फीसदी कर दिया था, जिससे इस साल रेपो दर में कुल कटौती 135 आधार अंक पहुंच गई है। पहले ये दर 5.40 फीसदी थी। नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम हुआ है। रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी कर दिया गया है और बैंक रेट 5.40 फीसदी हो गया है।

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