मज़दूर वर्ग का सशक्त मीडिया मजबूत करना ज़रूरी

नागरिक अखबार के सेमिनार में मज़दूरों, जनवादी आंदोलनों और जनता के दुःख तकलीफों में अखबार की भूमिका पर गहन चर्चा

दिल्ली, 20 अक्टूबर। नागरिक अधिकारों को समर्पित पाक्षिक समाचार पत्र द्वारा ‘फासीवाद और मीडिया’ पर सेमिनार आयोजित हुआ। सेमिनार में यह बात उभरकर आई कि मज़दूर वर्ग व मेहनतकश जनता के दुःख तकलीफों को उठाने के लिए मज़दूर वर्ग के सशक्त मीडिया को खड़ा करने और मजबूत करने की जरूरत है, जो मज़दूर-मेहनतकश जनता की आवाज व मुद्दों को निष्पक्ष व ठोस तरीके से उठाए।

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दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित सेमिनार की शुरुआत प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच बरेली के साथियों ने क्रांतिकारी गीत से की।

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सेमिनार पत्र पर बातचीत रखते हुए नागरिक के संपादक नरेंद्र ने कहा कि भारत में फासीवाद का खतरा आसन्न है। भारत का पूँजीपति वर्ग आज भाजपा को अपना मुफीद प्रतिनिधि मानता है और उसे सत्ता में लाने के लिए जी जान लगा दिया। भाजपा और आरएसएस का हिन्दुत्व हिन्दू धर्म से अलग है।  सेमिनार में वक्ताओं ने फसीवाद के चरित्र, भारत में हिन्दू फासीवाद के कारनामों और उससे लड़ने की जरूरत पर  बल दिया।

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वक्ताओं ने कहा कि आज हमारे देश में पहले ही भयंकर रूप से बेरोजगारी है। आर्थिक मंदी के बहाने मज़दूरों की छंटनी, फैक्ट्री बंदी से और ज्यादा नौजवान बेरोजगारी की लाइन में खड़े किए जा रहे हैं। भाजपा सरकार आने से पहले दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए मोदी सरकार के मंत्री संतरी राफेल की बात करते हैं। पूँजीवादी मिडिया सरकार की आलोचना की जगह हाँ में हाँ मिलाते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि खाद्यान्न सम्पन्न देश में आज भी करोड़ों लोग रोजाना एक टाइम भूखे पेट सोते हैं। हमारे देश का प्रधानमंत्री दस लाख का सूट पहनता है। अखबारों के लेख मोदी की सराहना करते है। भूखे मज़दूर मेहनतकश जनता के मुद्दा नहीं बनाते। शिक्षा, स्वास्थ्य, की मदो में कटौती के लिए सरकार की जनविरोधी नई आर्थिक नीतियों के खिलाफ वे कभी नहीं लिखते बल्कि तथाकथित देश के विकास के लिए जनविरोधी नीतियों की सराहना करते हैं।

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आज विकृत मानसिकता के लोग 5 साल से 80 वर्ष की उम्र तक की महिलाओं बच्चियों का बलात्कार और हत्या कर रहे हैं। लेकिन मिडिया घराने सरकार द्वारा फैलाई जा रही महिला विरोधी उपभोक्तावादी संस्कृति की आलोचना नहीं करते। वह महिला सशक्तिकरण, लव जिहाद, मंदिर मस्जिद जैसे मुद्दे उठाकर हिंदू मुस्लिम एकता तोड़ने का काम करते हैं।

यह सब इसलिए कर रहे हैं कि यह देश के मुट्ठी भर अमीरों का मीडिया है। परन्तु नागरिक अखबार मज़दूर वर्ग व मेहनतकश जनता का पक्षधर अखबार है। यह मजदूर वर्ग से जुड़ी हर समस्यायों को लेकर मुद्दा बनाता है। आम जनता को शिक्षण प्रशिक्षण करने का काम करता है। मज़दूर विरोधी सरकार से लडने की तैयारी का काम करता है।

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सेमिनार में अध्यक्ष मंडल में वर्कर्स यूनिटी के संदीप, यथार्थ से सिद्धांत, क्रालोस से पीपी आर्या, जन संघर्ष मंच से सी डी शर्मा, पीयूडीआर से अर्जुन जी और नारभिन्दर सिंह शामिल थे। सेमिनार का संचालन रोहित ने किया।

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