घायल थी आंख, श्रम अधिकारी ने दर्ज कर दिया हाथ

मज़दूर की दास्ताँ : मिलीभगत और अमानवीयता की कहानी, मज़दूर की ज़ुबानी

पीड़ित श्रमिक द्वारा मेहनतकश प्रतिनिधि को बताया गया कि मैनी कम्पनी में कार्य के दौरान हादसे में उसकी आंख बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसकी जिलाधिकारी से शिकायत के बाद सहायक श्रमायुक्त ने वार्ता बुलाई और घायल आंख को हाथ में चोट दर्ज कर दिया…

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। आज हमारे सामने एक मुद्दा आया जिसमें सहायक श्रम आयुक्त उधम सिंह नगर व श्रम भवन के अन्य अधिकारी द्वारा मजदूरों के अंग का सौदा किया जा रहा है।

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पंतनगर में स्थित मैनी कंपनी प्लॉट नंबर 1 सेक्टर नंबर 6 आईआईई, सिडकुल, पंतनगर के एक श्रमिक चंद्रपाल के साथ डेढ़ महीने पहले कंपनी में एक हादसा हुआ, जिसमें उसकी आंख पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गई तथा उसके परिजनों द्वारा उसका उपचार दिल्ली एम्स में करवाया गया।

पीड़ित श्रमिक के परिजनों द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय में प्रबंधक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। इसपर सहायक श्रमायुक्त ने दिनांक 21/08/2019 को वार्ता बुलाई। इसमें ईएसआई के बहाने कम्पनी को मुआवजा देने से बचाते हुए कोर्ट जाने की सलाह दे दी।

मगर सबसे ख़तरनाक बात यह हुई की प्रबंधक पक्ष व अधिकारियों द्वारा मिलीभगत कर श्रमिक के आंख के बदले हाथ को चोटिल बताकर मिनट्स में दर्ज कराया गया व उसके हाथ का उपचार ईएसआई से  करवाए जाने की सहानुभूति दी गई।

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मज़दूर चंद्रपाल ने 14 अक्टूबर को पुनः शिकायत करके इस भयानक मामले को उजागर किया। तब एएलसी ने कम्पनी के नाम पत्र जारी कर इसे लिपिकीय त्रुटी बताते हुए 18 अक्टूबर की वार्ता बुलाई और संशोधन के लिए तथ्य देने को कहा।

सवाल यह है कि इस भयावह मामले को लिपिकीय त्रुटी कैसे कहा जा सकता है? उसके बाद भी, जब मज़दूर द्वारा सारे दस्तावेज प्रस्तुत किए जा चुके थे, तब प्रबंधन से इसके लिए वार्ता की ज़रूरत क्यों पड़ी?

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मामला साफ है।

ऐसी त्रुटी मजदूरों के ही मामले में क्यों होती है? क्या यह प्रबंधन और श्रमाधिकारी की मिलीभगत नहीं है? क्या यह अमानवीयता की हद पार करने का भी मामला नही है?

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यह गौरतलब है कि आज कारखाने हादसों की फैक्ट्री बन चुके हैं, जहाँ मज़दूर के अंग-भंग होने से लेकर जान जाने तक सामान्य बात हो चुकी है। श्रम विभाग ऐसे हर मामले में ऑंखें मूँद लेता है। जहाँ मज़दूर आवाज़ उठाते हैं, वहाँ पुलिस सक्रिय हो जाती है। पूरा खेल मुनाफे की अंधी हवस का परिणाम है और पूरा सरकारी महकमा इसका भागीदार है।

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