और कितने “अच्छे दिन” चाहिए!

बैंक हुआ दिवालिया तो एक लाख रुपए से ऊपर की राशि होगी जप्त

यह ऐसा दौर है, जब बैंक दिवालिया हो रहे हैं, या बढ़ते एनपीए (कर्ज वापसी ना होने वाली राशि) के दौर में तमाम बैंक दिवालिया होने के कगार पर हैं। ऐसे में चाहें आपकी जीतनी भी राशि बैंक में जमा हो, मिलेगा केवल एक लाख रुपए ही… । आप घर एक सीमा से ज्यादा रुपए रख नहीं सकते, बैंक में रखना रिस्की है, … इससे ज्यादे अच्छे दिन क्या होंगे! …पढ़िए आर्थिक मामलों के जानकर गिरीश मालवीय की पोस्ट

लीजिए हो गया क्लीयर !…..कि यह फ़ोटो झूठी नही है पूरी तरह से सच्ची है, कल को आपके सेविंग एकाउंट की पासबुक पर ऐसी ही सील लगी मिले तो आश्चर्य मत कीजिएगा!…….

HDFC बैंक ने अपना स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि सील पर जो लिखा है उसमें ‘जमा पर बीमा कवर’ के बारे में जानकारी दी गई है। और यह जानकारी  आरबीआई ने 22 जुलाई, 2017 के सर्कुलर के आधार पर ही दी जा रही हैं, यह सील इसी आदेश का पालन करने की प्रक्रिया में लगाई गयी है।

आरबीआई ने अपने इस सर्कुलर में कहा था कि सभी कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेट बैंक को यह जानकारी ग्राहकों की पासबुक के पहले पन्ने पर देनी होगी। 

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इस स्टैम्प में जो लिखा है उसका अर्थ यह हैं कि ‘बैंक में जमा राशि DICGIC से बीमित है और अगर बैंक दिवालिया होता है तो फिर DICGIC प्रत्येक जमाकर्ता को पैसा देने के लिए दिवालिया शोधक के जरिए बाध्यकारी है। ऐसे में ग्राहकों को केवल एक लाख रुपये दो महीने के अंदर मिलेगा, जिस तारीख को उस ग्राहक ने क्लेम फाइल किया हो’।

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दरअसल RBI के निर्देश के मुताबिक सभी कमर्शियल और कोऑपरेटिव बैंक का डिपाजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) से बीमा होता है, जिसके तहत जमाकर्ताओं का 1 लाख रुपये पर सुरक्षा मिलती है। यानी अगर किसी परिस्थिति में आपका बैंक पूरी तरह से डिफाल्ट कर जाए तो ऐसे में आपके मात्र 1 लाख रुपये ही सुरक्षित हैं, जिसपर DICGC की ओर से गारंटी दी जाती है।

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इस 1 लाख रुपये में मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है। यानी अगर दोनों जोड़कर 1 लाख से ज्यादा है तो सिर्फ 1 लाख ही सुरक्षित माना जाएगा। साथ ही यह भी जान लीजिए कि आपका एक ही बैंक की कई ब्रांच में खाता है तो सभी खातों में जमा अमाउंट जोड़ा जाएगा और केवल 1 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा। हालांकि अब इस रकम को बढ़ा कर 2 लाख किये जाने की चर्चा चल रही है।

अब बताइये!…. और कितने अच्छे दिन चाहिए थे आपको?……..

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(पोस्ट साथी गिरीश मालवीय के फेसबुक से साभार)

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