हाई कोर्ट के आदेश से बजाज मोटर्स में यूनियन पंजीकृत

बजाज मोटर्स प्रबंधन व श्रम विभाग की मिलीभगत और दमन के बावजूद मजदूरों की जीत

पंतनगर (उत्तराखंड)। टाटा की वेंडर कंपनी बजाज मोटर्स में यूनियन बनाने की पहल लेते ही मज़दूरों का दमन तेज हो गया था। पदाधिकारियो के निलंबन व बर्खास्तगी के साथ प्रबंधन ने श्रम अधिकारियों से मिलीभगत करके यूनियन फाईल ख़ारिज करावा दी थी। मज़दूरों का संघर्ष जारी रहा और अंततः उच्च नयायालय, नैनीताल के आदेश के बाद यूनियन पंजीकृत हो गई।

पंजीकरण हेतु फ़ाइल लगते ही दमन तेज

12 नवंबर 2018 को बजाज ऑटो के श्रमिकों द्वारा यूनियन पंजीकरण के लिए उप रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन कार्यालय, रूद्रपुर में अपनी फाइल दाखिल की गई, जिसका वेरिफिकेशन 27 दिसंबर 2018 को संपन्न हुआ। यूनियन के वेरिफिकेशन होने के साथ ही प्रबंधन द्वारा प्रतिशोधवश अध्यक्ष चन्दन सिंह मेवाड़ी और उपाध्यक्ष कुंवर सिंह कंडारी को निलंबित कर दिया गया।

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यही नहीं, प्रबंधन ने महामंत्री कृपाल सिंह को भी निलंबित कर दिया। इसी के साथ 2 अन्य पदाधिकारियो व कार्यकारिणी के अन्य 4 सदस्यों को 2 माह तक कम्पनी के रिसेप्शन में बैठाकर फाइल वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया।

पदाधिकारियो को किया बर्ख़ास्त, नहीं डिगे मज़दूर

मज़दूरों ने यूनियन फाईल वापस नहीं ली तो प्रबंधन ने बौखलाहट में 10 अप्रैल 2019 को उपाध्यक्ष कुंवर सिंह को तथा 20 अप्रैल को अध्यक्ष चन्दन सिंह व महामंत्री कृपाल सिंह को बर्खास्त कर दिया। जिनका मामला फ़िलहाल श्रम न्यायालय काशीपुर में विचाराधीन है।

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यही नहीं, उसने 30 अप्रैल को संयुक्त मंत्री हेम चंद दुर्गापाल व 24 अगस्त को कोषाध्यक्ष विनोद जोशी को भी निलंबित कर दिया। वह पदाधिकारियो और कार्यकारिणी सदस्यों को परेशान करने के लिए उन्हें भारी और कठिन कामों में लगाने और बार-बार विभाग बदलने आदि द्वारा लगातार उत्पीडन बढ़ाता रहा, लेकिन मज़दूर हिम्मत नहीं हारे।

श्रम विभाग ने फ़ाइल रोकी, मज़दूर गए हाईकोर्ट

श्रमिकों द्वारा बार-बार अपनी फाइल के संबंध में श्रम निरीक्षक रुद्रपुर से जानकारी लेने के उपरांत भी फाइल में कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिससे यूनियन द्वारा उच्च न्यायालय में रिट याचिका लगाई गई। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को 28 दिनों के अंदर फाइल रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही पूरा करने का निर्देश दिया।

मिलीभगत का आलम यह है कि उपरोक्त आदेश के बावजूद 6 मई को रजिस्ट्रार द्वारा तीन कार्यकारिणी सदस्यों के बर्ख़ास्त होने का हवाला देकर फाइल को दाखिल दफ्तर कर दिया गया।

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मज़दूर फिर गए हाईकोर्ट, यूनियन हुई पंजीकृत

श्रम अधिकारियों के इस मनमानेपन के ख़िलाफ़ यूनियन ने पुनः उच्च न्यायलय में अनुचित श्रम अभ्यास का हवाला देकर अपील दाखिल की। उच्च न्यायलय ने रजिस्ट्रार को पुनः निर्देशित किया और 21 दिन में दाखिल दफ्तर फाइल पर विचार करने का आदेश पारित किया।

यूनियन ने न्यायलय के आदेश की प्रति 1 अक्टूबर को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियंस, हल्द्वानी को पत्र के साथ हस्तगत कराया। अंतत इस दबाव में 15 अक्टूबर को यूनियन पंजीकृत हुई और उन्हें रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त हुआ।

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दो बार पहले भी यूनियन बनाने का हो चुका था प्रयास

यहाँ उल्लेखनीय है कि बजाज मोटर्स के मज़दूरों ने पहले भी दो बार यूनियन बनाने के प्रयास किए थे, लेकिन उसमे उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी। दो बार तोड़-फोड़ का शिकार होने के बाद इस बार मज़दूरों की एक नई जुझारू टीम ने पहल ली और हर तरह के दमन का सामना करने के बावजूद मोर्चे पर जुटे रहे, और अंत में कामयाब हुए।

इस बड़ी जीत की साथ मज़दूरों के सामने अभी और भी चुनौतियाँ है। कंपनी में केवल 105 स्थाई मज़दूर हैं और मुख्य नेता बर्ख़ास्त या निलंबित हैं। लेकिन इस जीत से मज़दूरों के हौसले बुलंद हैं।

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मज़दूरों की इस कामयाबी पर इलाके की अन्य यूनियनों, संगठनों व श्रमिक संयुक्त मोर्चा के साथ मज़दूर सहयोग केंद्र ने बधाई दी है।

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