देश के सरकारी स्कूलों में 10 लाख टीचरों की कमी

यूपी में 3 लाख 85 हजार टीचरों के पद खाली, शिक्षा का स्तर कैसे उपर उठेगा ?

नई दिल्ली. सरकारी स्कूल (Government School) कुछ दशक पहले तक प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ थे, लेकिन हाल के वर्षों में इनके स्तर में बहुत गिरावट आई है. इसका सीधा फायदा मिला है निजी स्कूलों को. शहरों और कस्बों तक में निजी स्कूल खुल गए. लोग महंगी फीस दे कर बच्चों को इन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए मजबूर हैं.

सरकार ने शिक्षा के अधिकार का कानून भी बना दिया, लेकिन हकीकत ये है कि सरकारी स्कूलों में टीचरों की संख्या बहुत ही कम है. आरटीआई (RTI) के तहत मांगी गई एक जानकारी के जवाब में मानव संसाधन मंत्रालय (MHRD) ने स्वीकार किया है कि देश भर के सरकारी स्कूलों में 10 लाख से ज्यादा टीचरों के पद खाली पड़े हैं. खासतौर से यूपी बिहार जैसे राज्यों की हालत तो बहुत ही खराब है.

देश में टीचरों की कमी का ऐसे हुआ खुलासा

फरीदाबाद, हरियाणा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ओपी धामा ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) से देश के बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित कुछ सवालों की जानकारी मांगी थी. ओपी धामा ने पूछा था कि पहली से लेकर कक्षा 8 तक के सरकारी स्कूलों में तैनात टीचरों की संख्या कितनी है. वर्तमान में कितने टीचर स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वहीं अलग-अलग राज्यों में टीचरों के खाली पदों की संख्या कितनी है. जिसके जवाब में एमएचआरडी ने बीते 7 साल की जानकारी देते हुए बताया है कि देशभर में 10 लाख से ज्यादा टीचरों की कमी बनी हुई है.

सर्व शिक्षा अभियान में भी नहीं हैं टीचर

एमएचआरडी से आए आरटीआई के जवाब की मानें तो कक्षा 1 से 8 तक बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित होने वाले स्कूलों में राज्य सरकार और सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत टीचरों की नियुक्ति होती है. एसएसए का बजट केन्द्र सरकार की मदद से मिलता है. लेकिन राज्यों में दोनों ही तरह के टीचरों की हालत ठीक नहीं है. राज्य सरकार के अधीन आने वाले टीचरों की कमी 5.30 लाख है तो एसएसए के अंतर्गत आने वाले 4.91 लाख टीचरों का टोटा है.

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