माइक्रोमैक्स में गैरकानूनी ले-ऑफ हुआ निरस्त

भगवती-माइक्रोमैक्स प्रबंधन द्वारा बार-बार लेआफ लेने पर मजदूरों की आपत्ति के बाद श्रम विभाग ने जारी किया नोटिस

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड (माइक्रोमैक्स) के प्रबंधन द्वारा बार-बार गैरकानूनी लेऑफ लेने का मजदूरों ने कड़ा विरोध जताया। इस पर श्रम विभाग ने तत्काल कार्यवाही करते हुए लेऑफ़ को ग़ैरकानूनी घोषित कर दिया।

एएलसी ने नोटिस जारी कर बताया ग़ैरक़ानूनी

सहायक श्रमायुक्त ने कंपनी को नोटिस जारी करके कहा कि भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड द्वारा अब तक 1 साल में 45 दिन से ज्यादा का ले-ऑफ लिया जा चुका है। इसलिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 (उपांतरित उत्तराखंड) के प्रावधानों के तहत इससे अधिक ले-ऑफ लेने की सूचना को स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसके लिए कोई अनुमति प्रदान नहीं की जाती है। इसे निरस्त करते हुए भविष्य में भी ले ऑफ़ पर रोक लगा दी है।

श्रम विभाग में इस प्रकरण पर 9 अक्टूबर को त्रिपक्षीय वार्ता भी बुलाई है।

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टैक्स छूटों का लाभ उठाकर राज्य से पलायन की है अवैध कोशिश

भगवती प्रोडक्ट (माइक्रोमैक्स) का प्रबंधन सब्सिडी और टैक्स की छूटों का लाभ उठाकर राज्य से बाहर पलायन करने की योजना पर लगातार कार्य करता रहा है। इसी उद्देश्य से उसने 27 दिसंबर 2018 को 303 श्रमिकों की गैरकानूनी छँटनी कर दी थी। शेष बचे हुए श्रमिकों में से भगवती श्रमिक संगठन के अध्यक्ष सूरज सिंह बिष्ट की गैरकानूनी गेट बंदी कर दी और बाद में निलंबित कर दिया। बचे हुए मजदूरों को अब तक 80 दिन से ज्यादा का लेऑफ/काम बंदी के बहाने बाहर बैठा चुका है।

इसी क्रम में उसने एक बार फिर आज 7 अक्टूबर से 47 श्रमिकों के लिए गैरकानूनी लेऑफ का नोटिस चस्पा कर दिया। उक्त नोटिस में लेऑफ की कोई अवधि भी निर्धारित नहीं की गई है।

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मज़दूरों ने श्रम विभाग में दी चुनौती

मजदूरों ने एक बार फिर इसको श्रम विभाग में चुनौती दी। इससे पूर्व लगातार 45 दिन के लेऑफ़ के दौरान मजदूरों की आपत्ति पर सहायक श्रम आयुक्त उधम सिंह नगर की मध्यक्षता में वार्ता के दौरान पूर्ववर्ती लेऑफ को सवेतन काम बंदी बताकर उस वक्त के 45 दिन के लेऑफ को कानूनन सही बताया था, लेकिन यह स्पष्ट किया था कि 1 साल में प्रबंधन बगैर अनुमति इससे अधिक लेऑफ नहीं कर सकता।

आज उसी दबाव में श्रम विभाग को यह नोटिस जारी करना पड़ा। इसे गैरकानूनी घोषित करने के साथ ही भविष्य में भी बगैर अनुमति ले ऑफ़ पर रोक लगा दी है।

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साढ़े नौ माह से जारी है संघर्ष

माइक्रोमैक्स उत्पाद निर्माता भगवती प्रोडक्ट्स के मजदूर गैरकानूनी छँटनी के बाद 27 दिसंबर 2018 से संघर्षरत हैं। कंपनी गेट पर उनका साढ़े 9 महीने से लगातार धरना और 105 दिनों से क्रमिक अनशन जारी है।

तमाम आंदोलनात्मक गतिविधियों के साथ कानूनी लड़ाई उच्च न्यायालय नैनीताल से लेकर औद्योगिक न्यायाधिकरण हल्द्वानी तक में जारी है।

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पूरा सरकारी अमला मज़दूरों के खिलाफ रहा है

उत्तराखंड सरकार, शासन, प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग इस पूरे दौर में लगातार मजदूरों के खिलाफ रहा है। श्रम विभाग लगातार मामले को टालता रहा। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रमुख सचिव श्रम ने मजदूरों के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। जिलाधिकारी हर मुलाकात में मजदूरों को ही धमकाते रहे। पुलिस ने मजदूरों पर फर्जी मुकदमे ठोके। यहां तक कि लोकसभा चुनाव के दौरान मजदूरों पर दबाव बनाने के लिए जिला प्रशासन ने माइक्रोमैक्स और इंटरार्क के कुछ मजदूरों को चुनाव के समय खतरनाक अपराधी बताकर पाबंद तक किया था।

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इन विपरीत हालात में लंबे संघर्ष के बावजूद मजदूरों के हौसले बुलंद हैं और वे अपने संघर्ष को लगातार मजबूती दे रहे हैं।

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