मजदूरों ने लगाया श्रम विभाग पर मिलीभगत का आरोप

वोल्टास में मजदूरों का कटा वेतन, माइक्रोमैक्स में फिर ले-ऑफ

सत्यम ऑटो, एडविक, एमकोर, वोल्टास, माइक्रोमैक्स के हालात मोदी सरकार द्वारा बदलते श्रमक़ानूनी अधिकारों की शुरुआती बानगी मात्र हैं…

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। मजदूरों पर बढ़ते शोषण व मनमानेपन और श्रम विभाग द्वारा कार्यवाही करने की जगह मजदूरों को भरमाने के बीच मजदूरों ने मालिकों व श्रम विभाग की मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया है।

मजदूरों का कहना है कि कंपनियां मजदूरों के खिलाफ गैरकानूनी रूप से जो भी कार्रवाई करती है, वह श्रम विभाग की मिलीभगत से होता है और रास्ता भी श्रम विभाग ही दिखाता है। मजदूर जब अपनी शिकायत लेकर जाते हैं तो श्रम अधिकारी मामले को टाल देते हैं और उल्टे मजदूरों को नसीहत देते हैं कि कोई गैर कानूनी कार्रवाई मत करना।

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आज इन्हीं हालात में उत्तराखंड के भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स), वोल्टास लिमिटेड, एमकोर, एडविक, सत्यम ऑटो आदि के मजदूर संघर्ष कर रहे हैं।

वोल्टास में अवैध गेट बंदी के बाद गैर कानूनी वेतन कटौती 

सिडकुल पंतनगर स्थित वोल्टास लिमिटेड में माँग पत्र के विवाद को सुलझाने की जगह प्रबंधन में 25 सितंबर से यूनियन के अध्यक्ष महामंत्री सहित आठ मजदूरों का गैरकानूनी रूप से गेट बंद कर दिया और अब इन आठों श्रमिकों के वेतन से पांच ₹5000 की गैरकानूनी कटौती भी कर ली।

इस मुद्दे पर वोल्टास इम्पलाइज यूनियन द्वारा श्रम अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने मामले को टालते हुए 4 अक्टूबर की वार्ता की लंबी तिथि दे थी, लेकिन 4 अक्टूबर को प्रबंधकों पर बगैर कोई कार्यवाही किए 15 अक्टूबर की तिथि निर्धारित कर दी।

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यूनियन ने कहा कम्पनी को लेबर इंस्पेक्टर ने बताया रास्ता

यूनियन का कहना है कि वोल्टास प्रबंधन ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी के साथ 20 सितंबर को मिलीभगत के तहत कार्रवाई की और जिस वक्त प्रबंधन और श्रम अधिकारी की यह गुपचुप मंत्रणा चल रही थी, वहाँ मौजूद दूसरे कंपनियों के मजदूरों ने उसे सुन लिया था।

यूनियन ने लिखित रूप से यह शिकायत श्रम विभाग में दी, लेकिन श्रम अधिकारियों ने हंसते मुस्कुराते पत्र को रख लिया।

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माइक्रोमैक्स में फिर ग़ैरक़ानूनी ले-ऑफ

भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स) के प्रबंधन ने एक बार फिर मज़दूरों को ले-ऑफ देकर बैठा दिया है। पूर्व में 80 दिन की ग़ैरक़ानूनी लेऑफ़ के बाद 7 अक्टूबर से दिए गए लेऑफ़ में दिन और कंपनी खुलने का भी कोई जिक्र नहीं है।

ज्ञात हो कि माइक्रोमैक्स के मजदूर 27 दिसंबर 2018 से गैरकानूनी छँटनी के शिकार बन कंपनी गेट पर लगातार धरनारत और संघर्षरत हैं और विगत 103 दिनों से उनका क्रमिक अनशन भी चल रहा है।

प्रबंधन बाकी बचे मजदूरों को कथित रूप से ले-ऑफ के बहाने बार-बार बैठा दे रहा है। श्रम अधिकारियों से शिकायत करने पर इसमें कोई कार्रवाई न कर पाने की असमर्थता जताई जाती है।

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प्रबन्धन की बात को ही सही बताया अधिकारी ने

पिछले लेऑफ़ के समय मजदूरों ने एएलसी की वार्ता में 80 दिन कंपनी बंद होने की बात उठाई थी, जबकि प्रबंधन ने कानूनन 45 दिन लेआफ लेने के अधिकार की बात की थी और श्रम अधिकारी भी 45 दिन को कानूनी बताते रहे। बाकी दिनों को सवेतन अवकाश बोल दिया था।

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अभी एक बार फिर कंपनी ने बाकी मजदूरों को ले-ऑफ के बहाने बैठा दिया। प्लांट हेड ने साफ तौर पर कहा की एलसी, डीएलसी, डीएम, कोर्ट-कचहरी जहाँ भी जाओ, जो मैं चाहूँगा, वही कानून है।

अन्य कंपनियों के मज़दूरों का भी यही है हाल

सिडकुल सितारगंज स्थिति एमकोर के मजदूर 29 जुलाई से गैरकानूनी गेट बंदी के शिकार हैं, जबकि सिडकुल, हरिद्वार स्थित सत्यम ऑटो के 300 मजदूर 2017 से गैरकानूनी बर्खास्तगी झेल रहे हैं।

एडविक में यूनियन की मान्यता, एक श्रमिक की कार्यबहाली और रुके वेतन वृद्धि के लिए करीब डेढ़ साल से मज़दूर संघर्षरत हैं। श्रम विभाग अपने ही कराए गए दो समझौतों को लागू करवाने से हाथ खड़ा करता रहा और मजदूरों को लगातार संघर्ष के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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मोदी राज की यही है बानगी

ये हालात तब हैं, जब मोदी सरकार द्वारा बदले जा रहे हैं श्रम कानूनों को लागू होने की शुरुआत भर हुई है। अभी मालिकों के हित में ढेरों बदलाव बस होने ही वाले हैं।

साफ है, उन श्रम कानूनों के लागू होने के बाद मजदूरों की स्थिति इससे भी भयावह होगी।

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प्रचंड हमले के ख़िलाफ़ प्रचंड आंदोलन की ज़रूरत

ज़ाहिर है कि अलग-अलग टुकड़ों में बंटकर आज के कठिन समय मे कोई भी लड़ाई जीतना बेहद मुश्किल है।
हमला प्रचंड है, इसलिए मज़दूर वर्ग की व्यापक एकता, एक सही विचार और प्रचंड आंदोलन ही इसका मुक़ाबला कर सकता है!

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