पानीपत में कताई मिलों पर मंदी की मार, 50,000 से अधिक मजदूरों पर संकट

मेक इन इंडिया में सरकार ने बढ़ा दिया शुल्क, कम करने की मांग

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी के कारण पानीपत की चैबीस घंटे चलने वाली कताई मिलों ने सप्ताह में एक दिन प्रोडक्शन बंद रखने का निर्णय लिया है। कारोबारियों का कहना है कि यार्न की मांग में लगभग 40 प्रतिशत की मंदी है। पानीपत में लगभग 60 कताई मिलें, जहां प्रतिदिन लगभग 15-20 लाख किलोग्राम यार्न का उत्पादन होता है। मिलों को एक दिन बंद रखने से उत्पादन में 16-18 प्रतिशत की कमी आएगी।

उत्तरी भारत रोलर स्पिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, प्रीतम सिंह सचदेवा ने कहा कि पानीपत रीसाइक्लिंग उद्योग का एक केंद्र है, जिससे सूती कपड़े से सूत का उत्पादन होता है। उद्योग पुराने कपड़े का उपयोग करता है और इसे पुनर्चक्रण करने के बाद, उत्पादित धागा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाता है।

उन्होंने कहा कि पानीपत में प्रतिदिन 200 टन से अधिक कपड़ों का पुर्नवीनीकरण किया जाता है। बाजार में इस समय भारी मंदी का सामना करना पड़ रहा था। सचदेवा ने कहा कि घरेलू बाजार में भी मांग में 40 प्रतिशत की गिरावट है। “इसके अलावा, गोदाम स्टॉक से भरे हुए हैं। इसीलिए सदस्यों ने सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को अपनी इकाइयों को बंद करने का फैसला किया है। यह दो सप्ताह के लिए किया जाएगा और उसके बाद देखा जाएगा कि स्थिति क्या रहती है। उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगाा।

वह बताते हैं कि पहली बार इस उद्योग को इतनी तीव्र मंदी का सामना करना पड़ रहा हैं। 50,000 से अधिक लोग इन कताई मिलों पर निर्भर हैं और सैकड़ों छोटे उद्योग भी इन मिलों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुल बिजली का 60 फीसदी से अधिक का उपयोग केवल इन कताई मिलों द्वारा किया जाता है और बिजली बंद होने के बाद बिजली काफी बच जाएगी।

पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित गोयल का भी कहना है कि हम वैश्विक मंदी का सामना कर रहे हैं। निर्यात पर काफी असर पड़ा है। यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों की मांग भी 30-40 प्रतिशत घट गई है। पानीपत में पूरे कपड़ा कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है।

सचदेवा ने कहा कि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 16 जुलाई, 2018 को कपड़ा उद्योगों के निर्मात पर सीमा शुल्क 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया था। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के नाम पर तैयार या आधा-तैयार उत्पादों पर शुल्क में वृद्धि की गई है। यहां के उद्योगों के लिए जो कच्चा माल होता है, उस पर भी 5 से बढ़ाकर 20 फीसदी टैक्स कर दिया गया है। एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए।

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