बीएचयू : महिला शौचालय और कर्फ्यू टाइमिंग को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

छात्रसंघ बहाली व कई मांगों को लेकर छात्र 24 सितंबर से भूख हड़ताल पर

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू में छात्रों का विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा है. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में एक बार फिर छात्र और प्रशासन आमने-सामने हैं. छात्रसंघ बहाली व सभी छात्रों को हास्टल सुविधा देने की मांग समेत विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर बीएचयू के छात्र 24 सितंबर मंगलवार से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. ये सभी छात्र कैंपस में अधिष्ठाता कार्यालय स्थित छात्र परिषद भवन के बाहर चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के समीप भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में अकांक्षा, विश्वनाथ, रंजन, आशुतोष, शशिकांत का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. बताया जा रहा है कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक छात्रा भूख हड़ताल पर है.

हड़ताल पर बैठे एक छात्र विश्वनाथ ने बताया कि विगत 4 सितंबर को भगत सिंह छात्र मोर्चा की तरफ से हॉस्टल, महिला सुरक्षा, शैक्षणिक माहौल व कैंपस लोकतंत्र सहित अन्य बुनियादी मांगो को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया. पिछले सत्र में भी ज्ञापन दिया गया था लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी बीएचयू प्रशासन छात्रों के समस्याओं को निवारण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा.’

बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर अनुपम कुमार ने बताया कि, ‘एक तरफ जहां लाइब्रेरी में सीटों के लिए छात्रों में मारपीट हो जा रही, हॉस्टल के अभाव में स्टूडेंट्स किसी तरह छित्तूपुर या सीर गेट के पास महंगे रूम लेके रहने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ क्लास ना रेगुलर चलती है ना ही गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई होती है.’

पहली बार भूख हड़ताल पर है कोई छात्रा

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा आकांक्षा कहती हैं कि, ‘बीएचयू के कई फैकल्टी, डिपार्टमेंट में महिला शौचालय तक नहीं है. विकलांग छात्रों के पढ़ाई-लिखाई, आवाजाही के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है. आकांक्षा कहती हैं कि, ‘परिसर में खुलेआम छात्र-छात्राओं के बीच लैंगिक भेदभाव किया जाता है. छात्राओं के लिए हॉस्टल की पर्याप्त सुविधा नहीं है तो वहीं हॉस्टल को रात 11 बजे के बाद ही बंद कर दिया जाता है. छात्राओं के सुरक्षा के लिए जीएससीएएसएच (GSCASH- Gender sensitization committee against sexual harassment) को लागू नहीं किया गया है और इतने समस्याओं के बाद भी छात्रों का अपना कोई प्रतिनिधित्व भी नहीं है जिसके माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जाये. ऐसी स्थिति में अब हम आम छात्र-छात्राओं को अपनी लड़ाई खुद लड़ने की जरूरत है.

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की ये है प्रमुख मांगे :-

– लाइब्रेरी को 24 घंटे खोला जाय, नई व जरूरी पुस्तके तत्काल मंगाई जाय व साइबर लाइब्रेरी में सीटों की संख्या  बढ़ाकर 1000 की जाय.

– विश्वविद्यालय के सभी विभागों व संकाय में महिला शौचालय बनवाया जाय.

– महिला छात्रावासों से कर्फ्यू टाइमिंग खत्म की जाय व छात्राओं की सुरक्षा के लिये जीएससीएएसएच लागू किया जाए.

– सभी स्टूडेंट्स को हॉस्टल मुहैया कराया जाय और जबतक हॉस्टल नहीं मिल जाता तब तक उन्हें डेलीगेसी भत्ता दिया जाय.

– कैम्पस में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाई जाए.

– विकलांग छात्र – छात्राओं के लिए ईओसी (Equal opportunity cell) का गठन किया जाय, जो उनके एकेडमिक व अन्य जरूरत की चीजों को – छात्र संघ, कर्मचारी संघ व शिक्षक संघ बहाल करो.

– सभी महिला छात्रावासों में कैंटीन की व्यवस्था की जाय और कैंपस में 24×7 कैंटीन की व्यवस्था की जाय.

– सभी हॉस्टल के मेस व कैंटीनों को सब्सिडीयुक्त कर सस्ता किया जाय.

– नवीन हॉस्टल में एक रूम में 2 से अधिक छात्राओं का आवंटन बंद किया जाय.

लगातार खराब हो रही है छात्रों की तबीयत

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत लगातार खराब होती जा रही है. शुक्रवार को भूख हड़ताल के चौथे दिन अचानक आशुतोष की तबियत खराब हो जाने पर उन्हें सर सुंदरलाल में भर्ती करना पड़ा.

हड़ताल कर रहे छात्रों ने बताया कि, ‘बीएचयू प्रशासन इतना असंवेदनशील और तानाशाह है कि उन्हें अपने स्टूडेंट्स के तबियत की कोई चिंता भी नहीं है. भूख हड़ताल पे बैठे हमारे साथियों की भी तबियत लगातार खराब हो रही. प्रशासन के निरंकुश रवैये के विरोध में हमारे हड़ताली स्टूडेंट्स ने प्रशासन के मेडिकल टीम का बहिष्कार करने का फैसला लिया है. मेडिकल टीम भेज कर प्रशासन केवल खानापूर्ति कर रहा लेकिन स्टूडेंट्स के बुनियादी मांगो को पूरा करना तो दूर उन्हें सुनने तक नहीं आ रहा है.

भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा आकांक्षा ने बताया कि आज (भूख हड़ताल के चौथे दिन) जिला प्रशासन के तरफ से चिकित्सा विभाग के डॉक्टर आये थे. उन्होंने ये भी कहा कि हमारे हौसले अब भी बुलंद है और जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती है संघर्ष जारी रहेगा.

प्रशासन का जवाब, बेसलेस है मांग

इस हड़ताल के बारे में बीएचयू के पीआरओ डा. राजेश सिंह ने कहा, ‘धरना प्रदर्शन किसी का डेमोक्रेटिक राइट है, उसका एक तरीका होता है कि अपने प्रदर्शन के बारे में जाकर पहले बीएचयू के अथॉरिटी से बोलें, अगर नहीं हो रहा है तो हायर अथॉरिटी से अपनी बात कहें. जब उनकी बात नहीं सुनी जाय तब अल्टिमेटम दें कि हम धरना प्रदर्शन करेंग.’ डा. सिंह का कहना है कि, हड़ताल करने वालों की तरफ से विश्वविद्यालय को ऑफिशियली कोई सूचना नहीं मिली है.

डा. राजेश सिंह का कहना है कि, ‘हमारे पास 32 हज़ार बच्चे हैं. लेकिन धरना करने वालों के पास 32 सौ बच्चे भी नहीं है. अगर उनकी मांग उचित होती तो उनके पास तो कम से कम 32 सौ बच्चे होते. जितने स्टूडेंट बीएचयू के हॉस्टल में रहते हैं. उतने बच्चे एशिया के किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं रहते हैं.’

बच्चों की मांग को बेसलेस बताते हुए राजेश सिंह कहते है कि, ‘भारत सरकार के नियम में ऐसा कहीं है क्या कि बच्चों को भुगतान किया जाय? हमारे यहां सभी बच्चों को फ्री, इन्टरनेट है. केवल बीएचयू में ही साइबर लाइब्रेरी है.’

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को लेकर बीएचयू पीआरओ ने कहा कि, ‘हम लोगों को छात्रों ने कोई नोटिस नहीं दिया कि वो धरने पर बैठ रहे हैं. वो लोग कब बैठे, कहां बैठे बीएचयू प्रशासन को पता नहीं है. बीएचयू कैंपस में बिना किसी सूचना के धरना प्रदर्शन अनुशासनहीनता के दायरे में आता है.’

बीएचयू और सितंबर का है विवादों का रिश्ता

गौरतलब है कि वर्ष 2017 के सितंबर महीने में छेड़खानी के विरोध में छात्राओं के मुख्‍य द्वार पर धरने के चलते प्रधानमंत्री की फ्लीट के रास्‍ते में बदलाव करना पड़ा था. वर्ष 2018 में 23 सितंबर को आंदोलन की वर्षगांठ मना रही छात्राओं और छात्रों के बीच झड़प के बाद मामला बढ़ने पर छात्राएं धरने पर बैठी थीं.

इस साल 14 सितंबर को आंदोलन की शुरुआत छेड़खानी के आरोपित प्रोफेसर एसके चौबे को बहाल करने के विरोध के साथ हुई. छात्राओं के 27 घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद विश्विविद्यालय प्रशासन को प्रफेसर को लंबी छुट्टी पर भेजना पड़ा. अब छात्रों विभिन्न मांगो को लेकर भूख हड़ताल शुरू हो गई है. हड़ताल को देखते हुए कैंपस में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है.

(रिज़वाना तबस्सुम स्वतंत्र पत्रकार हैं) ( द प्रिंट से साभार )

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