30 सितंबर को दिल्ली में मजदूर संगठनों का खुला अधिवेशन

यहां तैयार की जाएगी देशव्यापी आंदोलन की रणनीति, बाद विरोध में संसद मार्च भी होगा

10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 30 सितंबर को दिल्ली में एक खुला अधिवेशन का आयोजन किया है। जिसमें केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। अधिवेशन के बाद संसद मार्च व विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।


पब्लिक सेक्टर के बैंकों को आपस में मर्ज करने की घोषणा करके केंद्र ने जनता विरोधी कदम उठाया है। सार्वजनिक बैंकों, इसके नेवटवर्क और जनता की गाढ़ी कमाई को केंद्र सरकार पूंजीपतियों को मुफ्त में दे देना चाहती है।


श्रम कानून में संसोधन कर उसे पंगु बनाने और रेलवे, माइनिंग व रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई का विरोध किया जाएगा। साथ ही सभी कर्मचारियों व मजदूरों को वेतन देने और 18,000 रूपये मासिक न्यूनतम मजदूरी की मांग की जाएगी।


अधिवेशन में मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमलों और श्रम कानूनों में बदलाव पर भी विस्तार से चर्चा किया जाएगा। नरेंद्र मोदी सरकार देशी-विदेशी पूंजीपतियों का गठजोड़ बना कर मजदूरों के अधिकारों को छीन रही है।


अधिवेशन में आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही देश में धीमी गति से हो रहे आर्थिक विकास व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 अक्तूबर से पूरे देश में सात दिनों के विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय की जाएगी।


अधिवेशन में इंटक, सीटू, एटक, एचएमएस, अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस, ट्रेड यूनियन कार्डिनेशन सेंटर, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल होंगे।

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