मंदी की मार : ज़ोमैटो ने निकला 540 कर्मचारी

ऑटोमोबाइल, फ़ूड, गारमेंट, हीरा कारोबार, रियल स्टेट से ज़ोमैटो तक छंटनी-बंदी का भयावह दौर

मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के परोसे गए सपने के बीच की हक़ीक़त यह है कि इस वक़्त देश का लगभग प्रत्येक क्षेत्र आर्थिक मंदी की चपेट में आने लगा है। ऑटोमोबाइल, फ़ूड, गारमेंट, हीरा कारोबार से लेकर रियल स्टेट तक छंटनी-बंदी का भयावह दौर चल रहा है। इसी क्रम में अब स्टार्टअप ज़ोमैटो ने भी छंटनी कर दी।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो ने अपने 540 कर्मचारियों को निकाल दिया है। कंपनी ने कस्टमर सपोर्ट स्टाफ में कमी करने के बहाने कर्मचारियों की छंटनी की है। पिछले महीने ही कंपनी ने 60 कर्मचारियों को बाहर कर दिया था। अंग्रेजी वेबसाइट ‘द मिंट’ में छपी एक खबर के मुताबिक कंपनी ने अपने गुरुग्राम स्थित हेड ऑफिस में कार्यरत कस्टमर, मर्चेंट और डिलीवरी पार्टनर सपोर्ट टीमों से ये छंटनी की है।

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हिंदी अख़बार ‘जनसत्ता’ में छपी ख़बर के मुताबिक कंपनी ने कहा ‘हमने 541 कर्मचारियों (जोमैट की कुल श्रम क्षमता का 10 प्रतिशत) को निकाला है। ये सभी कर्मचारी गुरुग्राम के हेड ऑफिस में तैनात थे। टेक्नॉलजी इंटरफेस में सुधार के चलते अब कस्टमर से जुड़ी पूछताछ में कमी आई है। ऑर्डर्स को लेकर सपोर्ट की जरुरत भी घट गई है। ऐसे में काम और वर्कफोर्स में अंतर आया है। कस्टमर सपोर्ट डिपार्टमेंट में वर्कफोर्स काम से ज्यादा है।

यह पहला मौका नहीं है जब जोमेटो ने अपनी कर्मचारियों की छुट्टी की है। 2015 में भी जोमैटो ने 300 लोगों को नौकरी से निकाल दिया था। उस वक्त ये संख्या जोमेटो के कुल कर्मचारियों का 10 फीसदी आंकड़ा था। मालूम हो कि देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्र संकट का सामना कर रहे हैं।

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आर्थिक सुस्ती के चलते जीडीपी वृद्धि दर पांच फीसद रह गई है। विनिर्माण क्षेत्र की दर आधा फीसद रह गई है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर दो फीसद रह गई है। देश के सार्वजनिक बैंक घाटे में हैं। उत्पादित वस्तुओं की मांग में कमी के कारण कंपनियों का कारोबार ठप हो गया है और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

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