दमन के बीच आगे बढ़ता रहा मारुति आंदोलन

मारुति मजदूर आंदोलन : एक नजर मे – 4

(18 जुलाई, 2012 की घटना के बाद मारुति मज़दूर आंदोलन संकटों से जूझकर नए किंतु कठिन संघर्ष के दौर में था… प्रोविजनल कमेटी के राम निवास की रिपोर्ट जारी…)

चौथी क़िस्त

12 जुलाई, 2018 की घटना के बाद भयावह दमन और बिखराव के बीच मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन, प्रोविजन कमेटी ने मज़दूरों को एकजुट किया और जमीनी व कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया।

उस वक़्त चुनौतियां कई थीं। एक तरफ जेल में बंद यूनियन की पूरी नेतृत्वकारी टीम सहित 148 मज़दूर थे तो दूसरी तरफ स्थाई-अस्थाई करीब ढाई हजार मज़दूर। मानेसर प्लांट के बाकी मज़दूरों को भी अंदर जाने का सवाल था। काफी भ्रम की भी स्थिति थी।

ऐसे हालात में प्रोविजन कमेटी ने बागडोर संभाली। देश-दुनिया के मज़दूर संगठनों और मज़दूर पक्षधर ताकतों का साथ मिला और आंदोलन आगे बढ़ा। उस वक़्त हालात ये थे कि गुड़गांव-मानेसर बेल्ट में धरना-प्रदर्शन भी होना लगभग असंभव था।

आंदोलन के विभिन्न चरण :

नवम्बर -2012 : मज़दूरों ने मनाई काली दीवाली

सभी बर्खास्त मजदूरों ने कैथल में उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के आवास पर काली दीवाली मनाने का निर्णय लिया। जब हनुमान वाटिका में मजदूरों की सभा चल रही थी तो इसी बीच में प्रशासनिक अधिकारियों ने कमेटी के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया और उद्योग मंत्री ने इस मामले को हल करवाने का आश्वासन दिया और बर्खास्त मजदूरों को श्रम मंत्री शिवचरण शर्मा के पास मीटिंग के लिए भेजा।

जनवरी -2013 : न्याय अधिकार रैली

21 जनवरी से 27 जनवरी तक हरियाणा भर में राज्य स्तरीय साइकिल जत्था द्वारा बर्खास्त मजदूरों ने अपनी मांगों को जनता के सामने रखा और अंतिम दिन 27 जनवरी को न्याय अधिकार रैली रोहतक में करने का आवाहन किया, जिसमें हजारों की संख्या में मज़दूर व समर्थक शामिल रहे। इसी बीच 25 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रोविजन कमेटी के ईमान खान को पुलिस ने उठा लिया और पर फर्जी मुक़दमा ठोंककर जेल में डाल दिया।

इसे भी देखें- मारुति मजदूर आंदोलन : एक नजर मे-1https://mehnatkash.in/2019/08/31/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%9c/

आंदोलन के दबाव में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने प्रोविजनल कमेटी को वार्ता के लिए चंडीगढ़ बुलाया। यह वार्ता असफल रही और मज़दूरों की किसी भी माँग को मुख्यमंत्री ने नहीं माना और संघर्ष लगातार जारी रहा।

फरवरी -2013 देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

कमेटी के आह्वान पर 5 फरवरी 2012 को पूरे भारतवर्ष में मारुति आंदोलन के समर्थन में 1 दिन का विरोध प्रदर्शन हुआ। देश के 15 राज्यों में 55 स्थानों पर मज़दूर संगठनों व आंदोलन के समर्थकों ने प्रदर्शन किया और हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भेजा। विरोध का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा।

मार्च -2013 : कैथल बना आंदोलन का नया केंद्र

24 मार्च 2013 से बर्खास्त मजदूरों ने उद्योग मंत्री आवास पर धरना चलाने का फैसला लिया। अन्य मज़दूर यूनियनों व जनपक्षधर संगठनों के समर्थन से उद्योग मंत्री आवास पर धरना शुरू हुआ।

धरने के 4 दिन बाद 28 मार्च, 2013 से मज़दूरों ने आमरण अनशन शुरू किया। इंसाफ़ की जगह उद्योग मंत्री ने कई मजदूरों के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवा कर मजदूरों को वहां से हटवा दिया। लेकिन दबाव में प्रशासन ने धरने के लिए डीसी ऑफिस पर जगह दी, जहाँ धरना लगातार जारी रहा।

आमरण अनशन के दबाव में उद्योग मंत्री ने फिर से मुख्यमंत्री के साथ एक समझौता वार्ता का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के साथ वार्ता में फिर से मजदूरों की माँगों को हल कराने के आश्वासन पर 9 दिन के बाद आमरण अनशन समाप्त हुआ। लेकिन यह आश्वासन भी झूठा साबित हुआ और सरकार द्वारा किसी भी माँग को नहीं माना गया।

मई -2013 : दमन और गिरफ्तारियां

लगभग 2 महीने के लगातार धरने के बाद भी सरकार ने मज़दूरों के किसी भी माँग को नहीं माना। तब मज़दूरों ने 19 मई 2013 को उद्योग मंत्री आवास के घेराव का निर्णय लिया। इससे एक दिन पूर्व 18 मई 2013 को 111 मज़दूरों व समर्थकों को धरने से पुलिस ने उठाकर उनको जेल में डाल दिया।

यह भी देखे- दमन का वह भयावह दौर https://mehnatkash.in/2019/09/02/%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%ad%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0/

इसके विरोध स्वरूप हजारों की संख्या में मजदूरों के परिवार जन व आम न्याय प्रिय लोग उद्योग मंत्री के आवास पर पहुँचे, जहाँ पुलिस द्वारा बड़ा तांडव हुआ। बर्बर लाठीचार्ज, पुलिसिया गोलीबारी व आंसू गैस के गोले में काफी लोग घायल हुए। आंदोलन के मुख्य नेताओं व समर्थकों पर फर्जी मुक़दमे ठोंककर जेल में डाल दिया गया।

क्रमशः जारी…

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