जन गीतकार शैलेन्‍द्र जन्‍मदिन 30 अगस्‍त की याद में

शंकर शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त, 1923 को रावलपिंडी में हुआ था. मूल रूप से उनका परिवार बिहार के भोजपुर का था.

कविता और प्रगतिशील नज़रिए के चलते शैलेंद्र इप्टा और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़ गए. 1947 में जब देश आज़ादी के जश्न और विभाजन के दंश में डूबा था तब उन्होंने एक गीत लिखा था, ‘जलता है पंजाब साथियों…

फिल्मों में उनके कई नायब गीत रहे हैं- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार…, नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है…, प्यार हुआ इक़रार हुआ है…, मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंगलिश्तानी…, रमैय्या वस्तावैय्या…, नैनों में थी प्यार की रोशनी…, आवारा हूँ आदि…

“तू ज़िन्दा है तो ज़िंदगी की जीत में यकीन कर” लिखने वाले शैलेन्द्र का इन सबसे अलग आज के दौर के लिए मौजू गीत…

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की,
देशभक्ति के लिए आज भी सज़ा मिलेगी फाँसी की!

यदि जनता की बात करोगे, तुम गद्दार कहाओगे–
बम्ब सम्ब की छोड़ो, भाषण दिया कि पकड़े जाओगे !
निकला है कानून नया, चुटकी बजते बँध जाओगे,
न्याय अदालत की मत पूछो, सीधे मुक्ति पाओगे,
काँग्रेस का हुक्म ज़रूरत क्या वारंट तलाशी की!

मत समझो, पूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से,
रुत ऐसी है आँख लड़ी है अब दिल्ली की लंदन से,
कामनवैल्थ कुटुम्ब देश को खींच रहा है मंतर से–
प्रेम विभोर हुए नेतागण, नीरा बरसी अंबर से,
भोगी हुए वियोगी, दुनिया बदल गई बनवासी की!

गढ़वाली जिसने अँग्रेज़ी शासन से विद्रोह किया,
महाक्रान्ति के दूत जिन्होंने नहीं जान का मोह किया,
अब भी जेलों में सड़ते हैं, न्यू-माडल आज़ादी है,
बैठ गए हैं काले, पर गोरे ज़ुल्मों की गादी है,
वही रीति है, वही नीति है, गोरे सत्यानाशी की!

सत्य अहिंसा का शासन है, राम-राज्य फिर आया है,
भेड़-भेड़िए एक घाट हैं, सब ईश्वर की माया है !
शान्ति सुरक्षा की ख़ातिर हर हिम्मतवर से डरना है
पहनेगी हथकड़ी भवानी रानी लक्ष्मी झाँसी की!


1948 में रचित

फोटो साभार

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