पारले बिस्किट कंपनी में भी मंदी की आहट

10 हजार श्रमिकों की नौकरी पर संकट

ऑटोमोबाइल, खुदरा उत्पादन, हीरा व्यापार, गारमेंट सेक्टर में मंदी के बाद अब खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर भी मंदी का साया मंडराने लगा है।

बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनी पारले प्रोडक्ट्स पर भी आर्थिक मंदी का प्रकोप दिखने लगा है। ऐसे में पारले कंपनी से जुड़े 8 से 10 हजार श्रमिकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। कंपनी के अनुसार अगर आर्थिक हालातों पर भविष्य में बुरा प्रभाव पड़ता है तो उन्हें कड़े फैसले लेने होंगे।

इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक बिस्किट की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे बिस्किट कंपनियां स्लोडाउन की स्थिति में हैं। पारले प्रोडक्ट्स के कैटेगरी हेड मयंक शाह ने बताया कि सरकार से मांग है कि बिस्किट पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कम किया जाए नहीं तो 8 से 10 हजार लोगों को बाहर निकलना पड़ेगा।

पिछले हफ्ते बिस्किट निर्माता ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण वैरी ने भी इसी तरह की बात कही थी और आर्थिक हालातों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि वर्तमान हालात में उपभोक्ता को 5 रुपये का बिस्कुट खरीदने में भी कई बार सोचना पड़ता है।

ज्ञात हो कि पारले के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट पारले जी, मोनेको और मैरी ब्रांड है। कंपनी की बिक्री 10,000 करोड़ से ज्यादा है। इसके सीधे तौर पर 10 प्लांट है जहां 1 लाख श्रमिक काम करते हैं। पारले के पास 125 थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है।

ज़ाहिर है कि मंदी की बयार अब आंधी का रूप लेती नज़र आ रही है।

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